करवा चौथ का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी के चंद्रमा के उदय में किया जाता है। इस बार व्रत 8 अक्टूबर, यानि आज है। इस दिन शाम चार बजकर 58 मिनट पर तृतीया समाप्त हो रही है। आठ अक्तूबर को ही शाम चार बजकर 59 मिनट से चतुर्थी तिथि का शुभारंभ होगा। यह कहना है चंडीगढ़ के सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का।
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Karwa Chauth in Chandigarh
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चंद्रमा के दर्शन और उपवास खोलने से पहले कुछ चीजें हैं जिनका खास ध्यान रखा जाना चाहिए। माना जाता है ऐसा नहीं करने पर चंद्रमा नाराज हो जाते हैं और पत्नी को उसकी पूजा का फल नहीं मिलता। जैसे उपवास वाले दिन महिलाओं को किसी को दूध, दही, चावल और सफेद कपड़ा नहीं देने चाहिए।
करवा चौथ वाले दिन महिलाओं को अपने से बड़ी उम्र की किसी भी बुजुर्ग महिलाओं का अपमान नहीं करना चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना जाता है। चांद देखने से पहले महिलाओं को मां गौरी की पूजा करना नहीं भूलना चाहिए। पूजा अर्चना करने के बाद मां को पूरी और हलवा का प्रसाद जरूर अर्पित करना चाहिए।
उधर, बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि करवा चौथ पर चंद्रमा रात आठ बजकर 13 मिनट पर निकलेगा। नौ अक्तूबर दिन सोमवार को चतुर्थी तिथि दोपहर में दो बजकर 17 मिनट पर समाप्त हो रही है। इसलिए करवाचौथ का व्रत आठ अक्तूबर को ही होगा। देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ लाल बहादुर दुबे ने बताया कि शास्त्रों में यह व्रत कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के दिन करने का विधान है।
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करवा चौथ
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सेक्टर-15 के जय श्रीराम ज्योतिष केंद्र के प्रमुख स्वामी राम बहादुर मिश्र और सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री के अनुसार, करवा चौथ पर पति की दीर्घायु एवं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए भालचंद्र गणेश जी की अर्चना की जाती है। इस दिन विवाहित महिलाएं सूरज निकलने से पहले उठकर सरगी खाती हैं, जोकि उन्हें उनकी सास द्वारा तैयार करके दी जाती है।