इंडियन एयरफोर्स डे के मौके पर हम आपको बता रहे हैं कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ प्रोजेक्ट ने एयरफोर्स को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
इंडियन एयरफोर्स भी अब तेजी से मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ प्रोजेक्ट में उड़ान भर रही है। इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में मौजूद रशियन हेलिकाप्टर के अधिकतर कलपुर्जे अब अपने देश में तैयार किए जा रहे हैं। इनमें से कुछ पुर्जे तो इंडियन एयरफोर्स खुद अपने बेस रिपेयर डिपो में तैयार करवा रही है और कई पुर्जे देश में मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस की अधिकृत मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों में तैयार हो रहे हैं। इन कलपुर्जों पर आने वाली लागत भी अपेक्षाकृत काफी कम पड़ रही है।
इंडियन एयरफोर्स के पास अपने ध्रुव, चेतक, चीता, एचएएल लाइट काम्बैट हेलिकाप्टर और एचएएल रूद्र हेलिकाप्टर के अलावा रूस से लिए गए रशियन हेलिकाप्टर की एमआई सीरिज मौजूद है, जिसमें एमआई-8, एमआई-17, एमआई-26, एमआई 25/35, एमआई-17आईवी, एमआई-17 वी 5 मौजूद है। ये सभी हेलिकाप्टर सरहद पर निगरानी केसाथ-साथ विभिन्न सैन्य अभियानों में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं।
रशियन हेलिकाप्टर की एमआई सीरिज के निर्माण में लगभग 2 लाख कलपुर्जों का इस्तेमाल होता है। रिपेयर के दौरान यदि किसी नए कलपुर्जे की जरूरत पड़ती थी तो उसे रूस से ही मंगवाना पड़ता था, लेकिन अब इंडियन एयरफोर्स इनमें से तकरीबन 65 हजार कलपुर्जों को यही देश में ही तैयार करवा रही है। इंडियन एयरफोर्स के एक आला अफसर ने बताया कि इसके लिए एयरफोर्स ने भी अपने वर्कशाप तैयार करवाई है, जिसमें नई चुनौतियों व रिसर्च के साथ यहां कलपुर्जों को तैयार करने का काम चल रहा है।
रशियन हेलिकाप्टर के इंजन के कुछ पार्ट्स हैदाराबाद में भी तैयार करवा जा रहे हैं, लेकिन अभी भी इंजन के अधिकतर पार्ट्स रूस से ही मंगवाए जा रहे हैं। इंजन की डायनामिक बैलेंसिंग बेस भी इंडिया में तैयार की गई है। इंजन का यह महत्वपूर्ण पार्ट्स है। क्योंकि असंतुलन की स्थिति में इंजन में कंपन शुरू हो जाता ह, इसलिए इंजन का बैलेंस बनाए रखना बहुत जरूरी है।