घर में खाने के लाले थे, मां ने लोगों के यहां काम कर करके बेटी को पाला। आज वो ऐसे मुकाम पर पहुंच गई है कि मां को बड़ा तोहफा देने जा रही है, जिसे देखकर उसकी आंखें छलक पड़ीं।
बात हो रही है, एथलीट खुशबीर कौर की। पंजाब के अमृतसर में गांव रसूलपुर कलां की रहने वाली 24 वर्षीय खुशबीर कौर को अर्जुन अवार्ड से नवाजा जाएगा। खुशबीर कौर ने पैदल चाल प्रतियोगिता में 2014 के एशियन गेम्स में भारत को रजत पदक दिलाया था।
ऐसा करने वाली वे पहली भारतीय हैं। साल 2007 में 14 साल की खुशबीर ने राज्य स्तर का 3000 मीटर रेस दौड़ जीती। एशियाई चैंपियन बलदेव सिंह ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उनसे ट्रेनिंग लेते हुए खुशबीर अंतराष्ट्रीय सर्किट में हिस्सा लेने लगी।
2010 के यूथ एशियाई खेलों में खुशबीर ने रजत पदक जीता। फिर खुशबीर 2012 में कोलंबो में हुई एशियन जूनियर चैंपियनशिप में दस हजार मीटर में कांस्य पदक जीतकर चर्चा में आईं। खुशबीर के नाम इस प्रतियोगिता का नेशनल रिकॉर्ड दर्ज है।
खुशबीर ने बचपन में ही पिता को खो दिया था। मां जसवीर ने परिवार को बमुश्किल पाला। दूसरों के घरों में काम भी करना पड़ा। 2008 में जूनियर नेशनल में खुशबीर इसलिए नंगे पांव दौड़ीं थी, क्योंकि परिवार दौड़ने के लिए महंगे जूते नहीं खरीद सकता था।