पिता ने घोड़ागाड़ी हांक-हांक कर पाला और बेटी ने टीम इंडिया की कैप्टन बनकर सिर फक्र से ऊंचा कर दिया। अब वो ओलंपिक गेम्स खेलने जाएगी, पढ़ें संघर्ष की कहानी।
2 of 10
रानी रामपाल
- फोटो : पीटीआई
बात हो रही है, भारतीय महिला हॉकी टीम की होनहार खिलाड़ी रानी रामपाल की, जो हरियाणा के शाहबाद मारकंडा की रहने वाली हैं। वे भारतीय महिला टीम की कप्तान हैं। उनकी अगुवाई में टीम अब ओलंपिक गेम्स 2020 खेलने टोक्यो जाएगी। हॉकी ओलंपिक क्वालीफायर के दूसरे मुकाबले में टीम को अमेरिका के हाथों हार के बावजूद टोक्यो ओलंपिक का टिकट मिल गया है।
3 of 10
मनप्रीत और रानी
- फोटो : सोशल मीडिया
शनिवार को भुवनेश्वर में खेले गए मुकाबले में 13वीं रैंक की अमेरिकी टीम ने भारतीय टीम को 4-1 से शिकस्त दी, बावजूद इसके सर्वाधिक गोल के आधार पर भारतीय टीम ने लगातार दूसरी बार ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया। भारत की तरफ से कप्तान रानी रामपाल ने आखिरी समय में टीम के लिए शानदार गोल किया और टीम को ओलंपिक का टिकट दिलाने में सफल रहीं।
रानी रामपाल उस शाहबाद से हैं, जिसे ‘हरियाणा का संसारपुर’ (संसारपुर पंजाब में है और हॉकी के लिए मशहूर है) कहा जाता है। यहां से भारत को महिला टीम की पूर्व कप्तान ऋतु रानी, रजनी बाला, नवनीत कौर, ड्रैग फ्लिकर संदीप सिंह और संदीप कौर जैसे मशहूर हॉकी खिलाड़ी मिले, रानी रामपाल का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा। जब भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए रानी का चयन हुआ, तब वे सिर्फ 14 साल की थीं और टीम की सबसे युवा खिलाड़ी थीं। रानी रामपाल को अर्जुन व भीम अवार्ड से नवाजा जा चुका है।
5 of 10
रानी रामपाल
- फोटो : फाइल फोटो
रानी रामपाल की जिंदगी बचपन से ही दुश्वारियों से गुजरी। पिता तांगा चलाते थे, लेकिन उन्होंने आज अपनी बेटी को उस मुकाम पर पहुंचा दिया है, जहां से वह पूरी दुनिया में अपना नाम रोशन कर रही है, देश का नाम चमका रही है। रानी को अपने पिता पर गर्व है और इसलिए उन्होंने अपने नाम के साथ पिता का भी नाम लगा रखा है।