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घर-घर डाक पहुंचाने के साथ अब पांच और काम भी करेंगे डाकिये, पढ़ें बड़े फायदे की ये खबर

Tue, 07 Jan 2020 12:37 PM IST
खुशबू गोयल जगजीत सिंह, अमर उजाला, रोपड़(पंजाब)
जगजीत सिंह, अमर उजाला, रोपड़(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 07 Jan 2020 12:37 PM IST
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Indian Postman Service and Working Area Changed, Post Offices
फाइल फोटो
घर-घर तक डाक पहुंचाने के साथ अब डाकिये कई अन्य काम भी करेंगे, जिनसे आम जनता को काफी फायदा होगा। 5 क्लिक करके पढ़ें अहम जानकारी...
Indian Postman Service and Working Area Changed, Post Offices
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डिजिटल युग में दूरसंचार के साधन काफी बढ़ गए हैं। अब ज्यादातर काम इंटरनेट की मदद से होता है, लेकिन इसके बावजूद डाकघरों में काम कम नहीं हुआ है। घरों तक डाक पहुंचाने वाले डाकिये आज भी अपने काम में उसी तरह जुटे हैं। वहीं अब डाकिये के पास डाक बांटने के अलावा लॉटरी टिकट बेचने, आईपीपीबी तथा सुकन्या जैसी स्कीमों के खाते खोलने के भी टारगेट हैं।
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डाकिया चाहे महिला हो या पुरुष डाक साइकिल पर जाकर ही बांटते हैं। बेशक डाकघरों का काम इंटरनेट आधारित हो गया है, पर डाक बांटने का सारा काम मैन्युअल ही है। आईआईटी और नाइलेट जैसे बड़े शिक्षा संस्थान आने से डाकघर में पार्सल का काम भी काफी बढ़ गया है। निजी कोरियर सर्विस से सरकारी डाक सस्ती होने के कारण धार्मिक किताबें व अन्य लिटरेचर ज्यादातर डाक के जरिए ही आ रहे हैं।
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डाकिया गुरमुख सिंह, मोहन वाल, बलदेव सिंह, बिशन दास आदि ने बताया कि जैन धर्म, निरंकारी, रतवाड़ा साहिब तथा आसाराम से संबंधित लिटरेचर व किताबें रोजाना बड़ी संख्या में आती हैं। इनको बांटने की जिम्मेदारी डाकियों पर ही होती है। महिला डाकिया मीना कुमारी ने कहा कि मौसम बरसात का हो, गर्मी हो या सर्दी काम हर मौसम में समय पर पूरा करना उनकी जिम्मेदारी है।
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डाकिये सुखर्दशन सिंह, ध्यान सिंह तथा कल्याण सिंह ने कहा कि 20 लॉटरी की 20 टिकटें प्रति डाकिये को बेचने का टारगेट दिया गया है। रोजाना एक खाता खोलने के लिए भी कहा गया है। बेशक आज डाक व्यवस्था को आसान करने के लिए इंटरनेट का प्रयोग किया जा रहा हो, पर उनके काम में इंटरनेट की कोई सहायता नहीं है। अब हाल पूछने की चिट्ठियां नहीं आती, बल्कि बैंकों, एलआईसी आदि के लेटर और कुछ अखबार डाक के लिए जरिए आते हैं।
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