देश पर कुर्बान होने से पहले शहीद मंदीप सिंह का पत्नी के नाम आखिरी पैगाम, जिसे पढ़कर सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा और बहादुर बेटे को सलाम करेंगे।
मैं तुमसे किसी विषय पर जरूरी बात करना चाहता हूं लेकिन अभी मैं बहुत व्यस्त हूं। जैसे ही समय मिलेगा मैं तुमसे बात करूंगा। यह वादा देश के लिए जान देने से चार दिन पहले शहीद मंदीप सिंह ने अपनी पत्नी राजविंदर कौर से किया था। उन्होंने पत्नी से कहा था कि वह घर में उनके माता-पिता और दोनों बच्चों का ध्यान रखें। उनकी चिंता मत करे। उनके पिता प्रेम सिंह जो दिल के मरीज हैं उनका खास ध्यान रखें।
राजविंदर कौर ने कहा कि उन्हें अपने पति की शहादत पर गर्व है। उनके पति ने देश के लिए शहादत का जाम पिया है। परिवार में उनकी कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। मंदीप अपनी ड्यूटी को सबसे प्रथम मानते थे। जब उन्हें घर आने के लिए कहा तो मंदीप ने कहा था कि अभी उनकी सख्त ड्यूटी चल रही है। बर्फ पड़ रही है और दो-दो बार छुट्टी नहीं मिल सकती।
पापा मेरे लिए बहुत सारी चीजें लेकर आएंगे
जब शहीद मंदीप सिंह के चार साल के बेटे अमृत सिंह से उसके पापा के बारे में पूछा तो उसने बड़ी मासूमियत से कहा कि उसके पापा उसके लिए पैंट, कमीज, जैकेट, चॉकलेट और टाफियां लेकर आएंगे। यह सब लाने का उसके पापा ने वादा किया था। लेकिन बच्चों को कौन समझाए कि उनके पापा उनसे बहुत दूर चले गए हैं और कभी लौटकर नहीं आएंगे।
9 सिख लाई रेजिमेंट के जवान मंदीप सिंह उतरी कश्मीर के कुपवाड़ा में बुधवार को आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। पंजाब में बटाला के गांव चाहल खुर्द के उनका अंतिम संस्कार वीरवार की देर शाम उसके पैतृक गांव में हुआ। शहीद के बेटे और पिता ने चिता को मुखाग्नि दी। इससे पहले पार्थिव शरीर के वहां पहुंचते ही पूरा गांव शौक में डूब गया।