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'हिंदू' कैप्टन ने कहे थे अंतिम शब्द, 'बेटी रुखसाना पढ़ लिख जाए' और शहीद हो गए, गजब का जज्बा
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 26 Jul 2018 09:33 AM IST
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कारगिल का योद्धा शहीद विजयंत थापर
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कारगिल विजय दिवस के मौके पर हम आपको सुना रहे हैं उस वीर योद्धा की कहानी, जिसने शहादत से पहले मां बाप को एक खत लिखा था और उसमें 'बेटी' के नाम आखिरी शब्द कहे थे।
कारगिल का योद्धा शहीद विजयंत थापर
कारगिल शहीद कैप्टन विजयंत थापर (रोबिन) में दुश्मन से टकराने का अटूट जज्बा था, लेकिन इस कैप्टन का दिल बिलकुल बच्चों के माफिक था। मूलरूप से हिमाचल के रहने वाले रोबिन को मालूम था कि हालात ऐसे हैं कि युद्धभूमि से उसका लौटकर आना मुश्किल है, लेकिन जेहन में एक कश्मीरी बच्ची रुखसाना की पढ़ाई की चिंता चल रही थी। इसलिए रोबिन ने अपने आखिरी खत में यह जिम्मेवारी अपने पिता कर्नल वीएन थापर को सौंपी थी।
Captain Vijayant Thapar
शहीद बेटे की इस जिम्मेवारी को कर्नल पिता आज भी बखूबी निभा रहे हैं। अमर उजाला से बातचीत करते हुए ‘सलाम सैनिक’ पुस्तक के लेखक हीरालाल यादव ने बताया कि घटना कुपवाड़ा की है। रोबिन बतौर कैप्टन वहीं तैनात थे। वे बच्चों से बहुत प्यार करते थे। इसलिए वहीं यूनिट के पास ही मैदान में खेलने वाले बच्चों के साथ ही खेलने निकल जाते थे। मगर, वहीं किनारे पर गुपचुप बैठी लगभग बच्ची को देखकर मन परेशान रहता था।
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रोबिन ने दूसरे बच्चों से पूछा तो मालूम चला कि वह रुखसाना है। उसके पिता को आतंकियों ने उसके सामने ही गोलियों से भून डाला था। तभी से इस बच्ची ने बोलना बंद कर दिया। बस, कैप्टन ने तभी ठान लिया। कई दिनों तक लगातार रोबिन अन्य जवानों के साथ खिलौने, किताबें, कापियां, पेंसिल, मिठाई, चॉकलेट लेकर रुखसाना के घर जाते और उससे घुलने-मिलने की कोशिश करते।
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कारगिल विजय दिवस
एक दिन रुखसाना घर से दूर थी, तो उसे बुलाने के लिए रोबिन ने जोर-जोर से उसे पुकारा, रोबिन की आवाज सुनकर रुखसाना ने बोलकर प्रतिक्रिया देने की कोशिश की और यह सोचकर कि रोबिन वापस न चला जाए, यह बच्ची भी चिल्लाती और रोती हुई रोबिन की ओर दौड़ी। कैप्टन ने भी नम आंखों से बच्ची को सीने से लगा लिया। आवाज लौटने के बाद कैप्टन ने रुखसाना का स्कूल में दाखिला करवा दिया।