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स्वतंत्रता दिवसः जानिए, उस शख्स के बारे में जो पाकिस्तान से लाया था कटी लाशों से भरी ट्रेन

Wed, 15 Aug 2018 08:17 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 15 Aug 2018 08:17 AM IST
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Independence Day, Indian Railway Guard Balkrishan Drives Train Full of Dead Bodies from Pakistan
1947 का गदर
1947 का गदर वो खौफनाक मंजर था, जिसे भूलना भी चाहो तो मुमकिन नहीं। 72वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जानिए उस शख्स के बारे में जो पाकिस्तान से कटी लाशों से भरी ट्रेन लेकर आया था।
Independence Day, Indian Railway Guard Balkrishan Drives Train Full of Dead Bodies from Pakistan
KASHMIR 1947 - फोटो : file photo
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बुजुर्ग बाल कृष्ण गुप्ता व सोहन सिंह की गदर की याद ताजा हो गई। वह बताते हैं कि यहीं से ट्रेन पाकिस्तान जाया करती थी और सन 1947 में दोनों देशों के बंटवारे के बाद बिगड़े हालात के दौरान दोनों देशों के कई लोग मरे थे।
Independence Day, Indian Railway Guard Balkrishan Drives Train Full of Dead Bodies from Pakistan
hussainiwala national martyrs memorial
रेलवे से सेवानिवृत चीफ कंट्रोलर बाल कृष्ण गुप्ता ने बताया कि दोनों देशों का जब बंटवारा हुआ था उस समय वो रेलवे में गार्ड थे। वे ही पाकिस्तान से इसी रेलमार्ग से लाशों से भरी ट्रेन हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन से होती हुई फिरोजपुर के छावनी रेलवे स्टेशन पहुंची थी।
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Independence Day, Indian Railway Guard Balkrishan Drives Train Full of Dead Bodies from Pakistan
hussainiwala national martyrs memorial
बाल कृष्ण गुप्ता बताते हैं कि उन्हें रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने आदेश दिया था कि पाकिस्तान के गंडा सिंह रेलवे स्टेशन पर भारतीय लोग फिरोजपुर आने का इंतजार कर रहे हैं। यह कहते हुए उन्हें ट्रेन लेकर पाकिस्तान भेजा गया, जब ट्रेन से भारतीयों को लेकर हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुए तो रास्ते में पाकिस्तान के कुछ शरारती तत्वों ने उनपर हमला बोल दिया।
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Independence Day, Indian Railway Guard Balkrishan Drives Train Full of Dead Bodies from Pakistan
hussainiwala national martyrs memorial
बाल कृष्ण गुप्ता बताते हैं कि ट्रेन में कई लोगों को तेजधार हथियार से काट दिया गया। ट्रेन खून से लथपथ थी। किसी तरह कुछ लोगों को बचाकर फिरोजपुर छावनी रेलवे स्टेशन पहुंचे। जब भी उन्हें ये दिन याद आता है उनकी आंखों से आंसू छलक उठते हैं। बुजुर्ग किसान सोहन सिंह ने बताया कि सन 1947 के गदर में इसी ट्रैक पर दौड़ने वाली ट्रेन पर पाकिस्तान की तरफ से कटी हुई लाशें भारत आई थी।
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