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देखिए देश का आखिरी रेलवे स्टेशन, जहां शहीदों की याद में साल में सिर्फ दो बार चलती है ट्रेन

Wed, 15 Aug 2018 08:17 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 15 Aug 2018 08:17 AM IST
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Independence Day, Last Railway Station of India Hussainiwala border
हुसैनीवाला बॉर्डर
72वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देखिए भारत का आखिरी रेलवे स्टेशन, जहां साल में केवल दो दिन आजादी की लड़ाई में देश पर कुर्बान होने वालों के लिए ट्रेन चलती है।
Independence Day, Last Railway Station of India Hussainiwala border
हुसैनीवाला बॉर्डर - फोटो : Amar ujala
ये है हुसैनीवाला बॉर्डर, जहां कि लिए पूरे साल में एक दिन, केवल 23 मार्च को और 13 अप्रैल को फिरोजपुर से एक स्पेशल ट्रेन चलती है। फिरोजपुर से लेकर हुसैनीवाला बॉर्डर तक स्पेशल ट्रेन 10 किलोमीटर का सफर तय करती है। एक समय में ये रेल लाइन हुसैनीवाला से होकर लाहौर तक जाती थी पर पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध के दौरान यह रेल मार्ग बंद कर दिया गया।
Independence Day, Last Railway Station of India Hussainiwala border
हुसैनीवाला बॉर्डर
यहां सतलुज दरिया पर बने रेल पुल को भी तोड़ दिया गया। अब फिरोजपुर से हुसैनीवाला में ही आकर रेल लाइन खत्म हो जाती है। रेलवे ट्रैक को ब्लॉक कर यहां लिखा गया है - द एंड ऑफ नार्दर्न रेलवे। गौरतलब है कि फिरोजपुर शहर से 10 किलोमीटर दूरी पर बने हुसैनीवाला बॉर्डर पर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की समाधि है।
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Independence Day, Last Railway Station of India Hussainiwala border
हुसैनीवाला बॉर्डर
इस समाधि पर 23 मार्च को हर साल मेला लगता है। शहीदी मेले में दूर-दूर से पर्यटक शामिल होते हैं। पिछले साल तो यहां के मेले में खुद पीएम मोदी आए थे। बहुत कम लोग जानते होंगे कि हुसैनीवाला स्थित समाधि स्थल 1960 से पहले पाकिस्तान के कब्जे में था। जन भावनाओं को देखते हुए 1950 में तीनों शहीदों की समाधि स्थल पाक से लेने की कवायद शुरू हुई।
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Independence Day, Last Railway Station of India Hussainiwala border
हुसैनीवाला बॉर्डर
करीब 10 साल बाद फाजिल्का के 12 गांव व सुलेमान की हेड वर्क्स पाकिस्तान को देने के बाद शहीद त्रिमूर्ति से जुड़ा समाधि स्थल भारत को मिल गया। सतलुज दरिया के करीब बने इस समाधि स्थल को अब पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जा रहा है। समाधि स्थल के आसपास ग्रीनरी क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। यहां पार्क और झूले-फव्वारे लगाए गए हैं। शुक्रवार और रविवार को खास तौर पर सैलानियों की भीड़ होती है।

 
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