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देखिए, योग मेगा फेस्ट का आगाज, श्री श्री ने दिया खुश रहने का मंत्र

Fri, 10 Jun 2016 12:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 10 Jun 2016 12:37 AM IST
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impressive debut of Yoga Mega Fest with sri sri RaviShankar
श्री श्री रविशंकर के साथ्‍ा योग मेगा फेस्ट का शानदार आगाज - फोटो : amar ujala

परेड ग्राउंड में श्री श्री के कार्यक्रम के साथ 4 दिवसीय योग मेगा फेस्ट का शानदार आगाज। श्री श्री ने दिया खुश रहने का मंत्र। दरअसल आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने योग की परिभाषा बताते हुए कहा कि सिर के बल खड़े होना और पेट को हिलाना ही योग नहीं है। हिमालय पर चले जाना भी योग नहीं है। योग भीतर की ऊर्जा को जगाना, दूसरों के आंसू पोंछना और खुशी देना ही योग है।

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impressive debut of Yoga Mega Fest with sri sri RaviShankar
श्री श्री रविशंकर के साथ्‍ा योग मेगा फेस्ट का शानदार आगाज - फोटो : amar ujala

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कर्टेन रेजर योग मेगा फेस्ट का आगाज करने श्री श्री रविशंकर वीरवार को यहां पहुंचे। सेक्टर-17 परेड ग्राउंड में आयोजित इस कार्यक्रम में श्री श्री ने अपने एक घंटे के संबोधन में योग और योगी की परिभाषा तो समझाई ही, साथ में लोगों को कुछ हल्के-फुल्के आसन भी करवाए। उन्होंने कहा कि शरीर का लचीलापन ही योगी की पहचान नहीं है। बल्कि जिसके मन में निष्ठा हो और हृदय खिला हुआ हो वही असली योगी है। योगी के चेहरे पर हमेशा स्माइल और मन में उत्साह होता है। प्राणायाम और ध्यान के बिना योग अधूरा है।

impressive debut of Yoga Mega Fest with sri sri RaviShankar
श्री श्री रविशंकर के साथ्‍ा योग मेगा फेस्ट का शानदार आगाज - फोटो : amar ujala
वेबकास्टिंग के जरिए इस पूरे कार्यक्रम का 71 देशों में लाइव प्रसारण किया गया। हजारों की संख्या में पहुंचें लोगों के मन में खूब उत्साह दिखा। पंजाब एवं हरियाणा के राज्यपाल और यूटी प्रशासक प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने भी श्री श्री केसाथ कुछ आसन किए। रविशंकर ने कहा कि 35 साल पहले योग का मतलब बस में करना, सम्मोहित करना माना जाता था। लेकिन आज योग की शक्ति को हर कोई जानने लगा है।
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श्री श्री रविशंकर के साथ्‍ा योग मेगा फेस्ट का शानदार आगाज - फोटो : amar ujala

योग का नशा सबसे बढ़िया: उन्होंने कहा कि युवा नशे से जूझ रहा है। ऐसे युवाओं को वह एक नया नशा योग दे रहे हैं। जो इस नशे से कहीं बढ़िया है। योग का यह नशा समाज में सौहार्र्दता फैलाता है। 3 महीने से लेकर 3 साल तक का बच्चा सभी योगासन करता है। जैसे जैसे वह बड़ा होता है योग बंद कर देता है। योग बंद करना विकृति का कारण है।
योग के हैं आठ अंग: रविशंकर के मुताबिक योग सही रूप में अष्ठांग योग है। सिर्फ आसन और प्राणायाम से योग संपन्न नहीं होगा। बल्कि इसके आठों अंगों को समझना और करना जरूरी है। इन आठ अंगों में यम, नियम, आसन, प्रत्याहार, प्राणायाम, धरना, ध्यान और समाधि आते हैं।

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श्री श्री रविशंकर के साथ्‍ा योग मेगा फेस्ट का शानदार आगाज - फोटो : amar ujala
ध्यान के तीन गोल्डन रूल
1. 10 मिनट तक यह सोचें कि मुझे कुछ नहीं चाहिए।
2. मैं जाप इत्यादि कुछ नहीं करूंगा।
3. मैं छोटा-बड़ा, अमीर गरीब, पुण्य-पापी कुछ नहीं हूं। इसके बाद पहले लंबी सांस लेकर आ की आवाज निकालें। फिर मन में ही यह धुन चालू रखें। सांस लेते रहें तो यह जाप अनंतकाल तक चलेगा। शब्द से निशब्द की ओर जाना और चल से अचल होना ही ध्यान है।
 
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