जीएसटी लागू होने के बाद फर्जी जीएसटी नंबर के जरिए लोगों के साथ फर्जीवाड़े के मामले सामने आए हैं। आप भी बचकर रहें और ऐसे करें असली की पहचान।
जीएसटी लागू होने के बाद कारोबारियों के उस गिरोह में काफी बेचैनी है, जो बिना रजिस्टर्ड कैश पर अपना ज्यादातर काम कर टैक्स की भारी चोरी करते थे। इनमें गैर रजिस्टर्ड कारोबारी शामिल हैं। अब ऐसे ही कारोबारियों की ओर से फर्जीवाड़े की आशंका बन गई है, जिसे लेकर जीएसटी आयुक्तालय ने अलर्ट किया है।
उद्योगपतियों और ग्राहकों से आह्वान किया गया है कि वे माल की खरीद-फरोख्त के दौरान जीएसटी पर आधारित जनरेट किए गए बिल पर जीएसटी नंबर की तस्दीक जरूर कर लें। विभाग के एक सीनियर अफसर ने बताया कि इस तरह टैक्स चोरी करने वाले कारोबारी अब फर्जी जीएसटी नंबर वाले इनवॉइस (बिल) जनरेट कर फर्जीवाड़ा कर सकते हैं, जिससे सरकार, कई उद्यमियों व ग्राहकों को भी चपत लगेगी।
जान लीजिए कि आपके साथ वे कारोबारी फर्जीवाड़ा करेंगे, जो पहले कैश या कच्चे बिल पर काम कर टैक्स चोरी करते थे और अब बिना जीएसटी रजिस्ट्रेशन के काम करेंगे। विभाग के आला अफसर ने बताया कि ऐसे कारोबारी खुद को जीएसटी में रजिस्टर्ड नहीं करवाएंगे, लेकिन अपने उद्यमी व अन्य ग्राहकों को जीएसटी नंबर का फर्जी इॅनवाइस दे सकते हैं।
क्योंकि पहले भी ऐसे कई मामले सामने आते रहे हैं, जिसमें फर्जी टिन नंबर के साथ कारोबारी काम कर टैक्स चोरी करते थे। इसमें भी ऐसे गैर रजिस्टर्ड कारोबारी फर्जीवाड़ा कर ग्राहकों से तो जीएसटी वसूलेंगे, लेकिन सरकार को जमा नहीं करवाएंगे। इसमें सरकार के साथ-साथ ग्राहकों को भी चपत लगेगी। उधर, इस फर्जीवाड़े से उन उद्यमियों को भी नुकसान होगा, जो गैर रजिस्टर्ड कारोबारियों के साथ बिजनेस करेंगे।