जीएसटी को लेकर एक नया प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें शामिल एक नियम लाखों लोगों के लिए मुसीबत बन सकता है। जानिए और इसके लिए तैयार रहिए।
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- फोटो : Amar Ujala
दरअसल, खराब वित्तीय हालत से घिरी पंजाब सरकार को केंद्र सरकार के एक प्रस्ताव ने जोर का झटका दिया है। केंद्र सरकार चाहती है कि जीएसटी के तहत राज्यों के हिस्से का फंड हर 15 तारीख के बजाये तीन महीनों पर जारी किया जाए। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा राज्यों को भेजे गए इस प्रस्ताव से पंजाब सरकार की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि जीएसटी से अपने हिस्से का फंड देरी से मिलने के कारण बीते दो महीनों से राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन भी नहीं दे सकी है।
यदि केंद्र सरकार की ओर से तीन महीने में अदायगी के फैसले को लागू किया गया तो पंजाब सरकार के लिए वेतन ही नहीं, दैनिक खर्च की राशि की व्यवस्था भी कठिन हो जाएगी। इसके अलावा खजाने में तीन महीने तक रकम नहीं आने पर कई अन्य मदों में भी सरकार ने लिए समस्या खड़ी हो जाएगी। सीएमओ से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार को अरुण जेटली का उक्त प्रस्ताव मिल गया है, लेकिन राज्य सरकार को यह मंजूर नहीं है।
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- फोटो : सोशल मीडिया
प्रस्ताव के विरोध का मुख्य कारण यह है कि केंद्र द्वारा जीएसटी के हिस्से का फंड हर 15 तारीख को दिए जाने के कारण राज्य सरकार बीते दो महीनों से अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन भी नहीं दे सकी है। राज्य के करीब 3.90 लाख कर्मचारियों के लिए हर महीने करीब 2200 करोड़ रुपये वेतन के भुगतान के रूप में दिए जाते हैं। आर्थिक तंगी के कारण ही लंबे समय से कर्मचारियों के डीए की किश्त भी रुकी हुई है।
टैक्स उगाही की पुरानी व्यवस्था के तहत राज्य सरकार को करों का पैसा नियमित रूप से प्राप्त होता रहता था, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों से करों की उगाही की रकम सीधे केंद्र को जा रही है। इसमें से राज्य के हिस्से का फंड केंद्र द्वारा रिलीज किया जा रहा है। इस फंड के रिलीज होने में देरी से पंजाब को पहले ही काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।