150 फीट गहरे बोरवेल में गिरकर जान गंवाने वाले दो साल के मासूम फतेहवीर सिंह की मां के आंसू तो सूख तो गए हैं, पर वो कुछ बोलती नहीं है। पढ़ें पीड़ित परिवार की आपबीती।
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फतेहवीर सिंह का परिवार
- फोटो : अमर उजाला
फतेहवीर के दादा रोही सिंह ने कहा कि मां गगनदीप गुमसुम बैठी अपने बेटे की तस्वीर को निहारती रहती है। कुछ बोलती नहीं, बस काम करती रहती है और बेटे की उस तस्वीर को देखती रहती है, जिसके आगे उसने फतेह के सारे खिलौने रख दिए हैं। वह अपनी सुध खो चुकी है। उसके आंसू तो सूख गए हैं, लेकिन वह चुप हो गई है। घर के आंगन में एक अजीब सा सन्नाटा छा गया है, जो खाने को दौड़ता है।
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फतेहवीर सिंह का परिवार
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रोही सिंह ने बताया कि फतेहवीर की आवाजें गूंजती रहती हैं। पिता सुखविंदर सिंह भी सुबह उठकर अपने काम में लग जाता। रात को वापस आता, खाना खाता और सो जाता। न किसी से कुछ कहता और न ही बात करता। ओह जन्मां जन्मां तक फतेहवीर दे जान दा गम नहीं भुल सकदा। फतेहवीर की हरकतें चार साल के बच्चे से भी ज्यादा तेज थीं और उसने तो पूरी दुनिया की हमदर्दी हासिल की है। काश वह सभी के बीच होता।
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फतेहवीर सिंह का परिवार
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रोही सिंह ने बताया कि ओस दिन 6 जून नूं फतेह सवेरे मेरे नाल बाइक ते गया सी। पर मैनूं कि पता सी आथने आह भाणा बरतू। असीं बाइक बिच्च पेट्रोल पवाण गए सी तां फतेहवीर ने चाबी नाल बाइक दी तेल वाली टंकी खोल दिती। ऐह वेख के पेट्रोल पंप वाले वी हैरान हो गए।’ फतेहवीर दे बगैर तां सारा घर ही खान नूं आ रहया है, सारा दिन साडे नाल खेडदा सी, रब्ब छेती फतेहवीर नूं फेर इत्थे जन्म देवे तां ही साडा दर्द घटेगा।’
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फतेहवीर सिंह
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गौरतलब है कि गत छह जून को संगरूर जिले में सुनाम के गांव भगवानपुरा निवासी सुखविंदर सिंह का दो साल का बेटा फतेहवीर खेत में बने बोरवेल में गिर गया था। पुराने बोरवेल को कट्टे से ढककर रखा गया था, लेकिन बारिश पड़ने से वह कमजोर हो चुका था। खेलते-खेलते बच्चे का पैर उस पर आ गया और उसके दबाव से कट्टा बोरवेल में धंसता चला गया। उसके साथ फतेहवीर भी बोरवेल में गिरता चला गया।