फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

ताया-भतीजी को एक साथ मिला खेल अवार्ड, देखिए सफलता की कहानी

Tue, 30 Aug 2016 09:13 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 30 Aug 2016 09:13 AM IST
विज्ञापन
dronacharya award winner mahavir phogat and arjun award winner vinesh phogat success story
महाबीर फोगट और विनेश फोगट को मिला खेल अवार्ड
मौका राष्ट्रीय खेल दिवस का और पहली बार एक की परिवार के दो लोगों को मिला खेल अवार्ड, वो भी तायाऔर भतीजी को। जानिए इनकी सफलता की कहानी।
dronacharya award winner mahavir phogat and arjun award winner vinesh phogat success story
महाबीर फोगट और विनेश फोगट को मिला खेल अवार्ड
जी हां, बात हो रही है बलाली के पहलवान पिता महाबीर फोगट और उनकी भतीजी विनेश फोगट की। दोनों को आज राष्ट्रपति भवन में महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खेल अवार्ड से सम्मानित किया। महाबीर फोगट को द्रोणाचार्य अवॉर्ड मिला, जबकि उनके भाई की बेटी विनेश फोगाट को अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा गया।
dronacharya award winner mahavir phogat and arjun award winner vinesh phogat success story
महाबीर फोगट और विनेश फोगट को मिला खेल अवार्ड
महाबीर फोगट ऐसे बने द्रोणाचार्यः महाबीर फोगट 10-11 साल की उम्र में ही अखाड़ों तक जाने लगे। 14-15 साल की उम्र तक कई दांव-पेंच सीख लिए। अपने से बड़े पहलवानों को भी आसानी से चित कर देते। गांवों के दंगलों के बाद महाबीर 1979 में दिल्ली के चंदगी राम अखाड़ा पहुंचे। यही से पहलवानी की असली ट्रेनिंग शुरू हुई। शादी के बाद महाबीर गांव लौट आए और विश्व में कुश्ती को पहचान दिलाई।
विज्ञापन
विज्ञापन
dronacharya award winner mahavir phogat and arjun award winner vinesh phogat success story
महाबीर फोगट और विनेश फोगट को मिला खेल अवार्ड
अखाड़ा चलाने के लिए लिया कर्ज: महाबीर फोगट की चारों बेटियां आज इंटरनेशनल पहलवान हैं, लेकिन उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी। अखाड़ा चलाने के लिए और बेटियों की डाइट व ट्रेनिंग के खर्चे के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ा। बता दें कि एक पहलवान की ट्रेनिंग और खान पान पर करीब 50 से 60 हजार रुपए हर माह का खर्च आता है। इसके लिए उन्होंने अपना घर और खेती भी दांव पर लगा दी।
विज्ञापन
dronacharya award winner mahavir phogat and arjun award winner vinesh phogat success story
महाबीर फोगट और विनेश फोगट को मिला खेल अवार्ड
बेटियों को बनाया अंतर्राष्ट्रीय पहलवानः 1988 में गीता का जन्म हुआ तो ठान लिया की इसे पहलवान बनाएंगे। 11 साल की होते ही गीता को कड़ा प्रशिक्षण देने लगे। दूसरी बेटी बबीता भी बड़ी बहन के नक्शे कदम पर थी। इसके बाद रितु और संगीता भी पहलवानी करने लगीं। विनेश और प्रियंका महाबीर के भाई की बेटियां हैं। भाई के असमय निधन के बाद महाबीर ने ही इन्हें भी संवारा। जिसका नतीजा आज दुनिया के सामने है।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed