88 साल बाद भारतीय एयरफोर्स ने देश के पहले हवाई सिपाहियों को याद किया है। एयरफोर्स ने उन्हें देश का गौरव बताया है। इन्हें अंग्रेजों ने एक खास मकसद से ट्रेनिंग दी थी तो आइए जानते हैं कि आखिर अंग्रेजों ने इन सिपाहियों को रॉयल एयरफोर्स के लिए क्यों ट्रेनिंग दी थी।
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भारतीय वायुसेना
- फोटो : Twitter @IAF_MCC
देश में ब्रिटिश आर्मी के साथ-साथ रॉयल एयरफोर्स भी तैयार थी। रॉयल एयरफोर्स भारत में अंग्रेजों की बड़ी हवाई ताकत थी। जिसमें अफसर और पॉयलट सभी अंग्रेज अफसर ही होते थे। ब्रिटिश आर्मी की तर्ज पर भारतीयों को रॉयल एयरफोर्स में भी पॉयलट और अफसर पद के अलावा अन्य पदों पर ही तैनात किया जाना था। लेकिन 21 जनवरी 1931 में पहली बार अंग्रेजों ने अपनी हवाई ताकत बढ़ाने के लिए भारतीयों पर भरोसा जताया।
इसके तहत अफसरों ने यह फैसला लिया कि अब भारतीयों को भी रॉयल एयरफोर्स में पॉयलट्स बनाया जाए, ताकि वे अपनी कुशलता के बूते रॉयल एयरफोर्स को और मजबूती दें। इसी फैसले के तहत अंग्रेजों ने कराची स्थित एयरक्राफ्ट डिपो में 22 भारतीय सैनिकों को विशेष ट्रेंनिग करवाई। इस बैच में 19 सैनिक सैनिकों का चयन किया गया। जिन्हें अंग्रेजों ने अपनी रॉयल एयरफोर्स में पॉयलट बनाया।
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Indian Airforce
- फोटो : File Photo
इन पॉयलट को उस वक्त के सभी विमानों को उड़ाने के लिए सक्षम बनाया गया था। दरअसल, उस वक्त अंग्रेजों ने अपने बेड़े में कुछ नए विमानों जैसे की विभिन्न स्ट्राइक फाइटर्स, तीसरी पीढ़ी के सुपरसोनिक इंटरसेप्टर, ट्राई-सोनिक टोही विमान, रणनीतिक भारी लिफ्ट परिवहन, मध्यम सामरिक परिवहन विमान व प्रकाश परिवहन विमान शामिल किए थे।
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वायुसेना
- फोटो : अमर उजाला
अंग्रेजों को भी और पॉयलट्स की जरूरत थी। आजादी के बाद रॉयल एयरफोर्स भारतीय वायुसेना बनी और इन पॉयलट्स को देश के पहले ‘हवाई सिपाही’ का नाम दिया गया। अब 88 साल बाद इंडियन एयरफोर्स ने देश के पहले इन हवाई सिपाहियों को याद करते हुए उन्हें देश का गौरव बताया है।