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23 साल की उम्र में जान देकर बचाई थीं 360 जिंदगियां, ऐसी थी 'ब्रेव डॉटर ऑफ इंडिया'

Tue, 05 Sep 2017 09:58 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 05 Sep 2017 09:58 AM IST
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brave daughter of india neerja bhanot death anniversary
नीरजा भनोट की कहानी - फोटो : File Photo
सेल्यूट टू ब्रेव डॉटर ऑफ इंडिया, जिसने 23 साल की उम्र में अपनी जान गंवाकर 360 लोगों की जिंदगी बचाई थी। इनकी शहादत को पाकिस्तान भी सलाम करता है, जानिए कौन है?
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बहादुर बेटी नीरजा भनोट
ये है, नीरजा भनोट। आज यानी 5 सितंबर को इन्हें आतंकियों ने गोलियों से छलनी कर दिया था। इस बहादुर बेटी ने भारत ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'अशोक चक्र' से नवाजा तो पाक ने तमगा-ए-इन्सानियत से। भारत सरकार ने नीरजा के नाम पर डाक टिकट भी जारी किया था। मोगा के गांव घलकलां के देशभगत पार्क में उसका एकमात्र स्टेच्यू स्थापित किया गया है। वहीं पर 16 फुट लंबा जहाज बनाया गया है।
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बहादुर बेटी नीरजा भनोट
चंडीगढ़ में 7 सितंबर 1964 को जन्मी नीरजा भनोट को उसके जन्मदिन से दो दिन पहले 5 सितंबर 1986 के दिन आतंकियों ने गोली मार दी थी, लेकिन दम तोड़ने से पहले इस बेटी ने 360 लोगों की जानें बचाई थी। 17 घंटे तक वह आतंकियों से जूझती रही। 5 सितंबर 1986 को पाकिस्तान के कराची एयरपोर्ट पर Pan Am 73 एयरलाइंस का प्लेन  हथियार बंद 4 आतंकवादियों हाईजैक कर लिया था।
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बहादुर बेटी नीरजा भनोट
आतंकवादी प्लेन को 9/11 की तरह इजराइल में किसी निर्धारित जगह पर क्रैश कराना चाहते थे। लेकिन प्लेन में मौजूद फ्लाइट अटेंडेंट नीरजा भनोट ने ऐसा नहीं होने दिया। उसने हिम्मत दिखाते हुए लोगों को बचा लिया, पर अपनी जान गंवा दी। नीरजा का बचपन मुम्बई में बीता। स्कूली शिक्षा बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल से हुई और सेंट जेवियर्स कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री ली।
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बहादुर बेटी नीरजा भनोट
नीरजा को बचपन से ही प्लेन में बैठने और आकाश में उड़ने की इच्छा थी। नीरजा भनोट की शादी 1985 में हो गई थी, लेकिन दहेज के दबाव के कारण उनके रिश्तों में खटास आ गई। वे शादी के दो महीने बाद ही मुम्बई लौट आई थीं। 1986 में मॉडल के रूप में उन्होंने कई TV और प्रिंट ऐड करना शुरू कर दिए थे। शौक को पूरा करने के मकसद से नीरजा ने बाद में एयरलाइंस ज्वाइन कर ली।

 
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