नोटबंदी के बाद हुए चंडीगढ़ नगर निगम चुनावों में जनता ने भाजपा को ऐसा बहुमत दिया है जिससे भाजपा तो गदगद है लेकिन कांग्रेस भूले नहीं भूलेगा।
नोटबंदी का कोई भी असर मतदाताओं पर नहीं पड़ा है। भाजपा अकाली गठबंधन ने 21 सीट पर जीत दर्ज करके यह साबित कर दिया है। ऐसा पहली बार हुआ है कि जब शहरवासियों ने किसी पार्टी को बहुमत से ज्यादा सीटे दी है।
भाजपा को 20 और अकाली दल ने एक सीट पर जीत दर्ज की है। जबकि कांग्रेस ने 4 सीट पर ही जीत दर्ज की है कांग्रेस ने 4 में से तीन उन सीटों पर जीत दर्ज की है जिनमे उनके मुकाबले में अकाली दल के उम्मीदवार मैदान में थे।
भाजपा के पक्ष में इस तरह की लहर चली कि कांग्रेस के दिग्गज नेता भी हार गए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा की पत्नी भी चुनाव हार गई। जबकि कांग्रेस सिर्फ चार सीट पर ही जीत दर्ज कर पाई है। यहां तक चुनाव में बाहरी और लोकल उम्मीदवार भी नहीं चला।
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चंडीगढ़ नगर निगम चुनावों में खिला कमल
भाजपा ने 11 बाहरी उम्मीदवार मैदान में उतारे थे जिनमे से भाजपा ने 10 सीटे जीती है। 26 में से 21 सीट पर जीत दर्ज करके भाजपा अकाली गठबंधन अपने दम पर अगले 5 साल में मेयर बनाएगी। मेयर बनने के लिए भाजपा को 19 वोट की जरूरत है जबकि उनके पास दो वोट ज्यादा है।