{"_id":"5b8f6e0e867a55486b0fb127","slug":"asian-games-2018-gold-medalist-tejinder-pal-singh-toor-interview-on-father-death","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"पिता की मौत पर बोले एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट तेजिंदर पाल सिंह तूर, मैं अब अनाथ हो गया हूं...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिता की मौत पर बोले एशियन गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट तेजिंदर पाल सिंह तूर, मैं अब अनाथ हो गया हूं...
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोगा(पंजाब)
Updated Wed, 05 Sep 2018 02:20 PM IST
विज्ञापन
तेजिंदर पाल सिंह तूर
एशियन गेम्स 2018 में गोल्ड मेडल जीतने वाले तेजिंदर पाल सिंह तूर घर पहुंचने से पहले पिता की मौत से बिल्कुल टूट चुके हैं। वे बार-बार यही कह रहे हैं कि मैं अब अनाथ हो गया हूं।
tejinder pal singh
पिता को गले लग मेडल पहनाने की हसरत रह गई अधूरी
जकार्ता में 18वें एशियन गेम्स में शॉटपुट में स्वर्ण पदक जीतकर रिकॉर्ड बनाने वाले तेजिंदरपाल सिंह तूर मोगा के अपने गांव खोसा पांडो में पहुंचकर सबसे अपना यह मेडल अपने पिता कर्म सिंह हीरो को पहनाना चाहते थे। उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाने वाले कैंसर से जूझ रहे किसान पिता को वह गले लगकर यह तोहफा देना चाहते थे। लेकिन जैसे ही वह दिल्ली पहुंचे तो उन्हें अपने पिता के निधन का समाचार मिला। इस खबर ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। आंखों से झरझर गिरते आंसू उनके टूटे अरमानों को बयां कर रहे थे।
जकार्ता में 18वें एशियन गेम्स में शॉटपुट में स्वर्ण पदक जीतकर रिकॉर्ड बनाने वाले तेजिंदरपाल सिंह तूर मोगा के अपने गांव खोसा पांडो में पहुंचकर सबसे अपना यह मेडल अपने पिता कर्म सिंह हीरो को पहनाना चाहते थे। उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाने वाले कैंसर से जूझ रहे किसान पिता को वह गले लगकर यह तोहफा देना चाहते थे। लेकिन जैसे ही वह दिल्ली पहुंचे तो उन्हें अपने पिता के निधन का समाचार मिला। इस खबर ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। आंखों से झरझर गिरते आंसू उनके टूटे अरमानों को बयां कर रहे थे।
तेजिंदर पाल सिंह
पिता रस्साकशी के अच्छे खिलाड़ी थे
तूर ने बताया कि उनके पिता कर्म सिंह (54) खुद भी रस्साकशी के अच्छे खिलाड़ी थे। उन्हें 2015 में स्किन कैंसर डाइग्नोज हुआ था। लेकिन मुसीबत यही खत्म नहीं हुई। एक साल बाद पिता को बोन कैंसर डाइग्नोज हुआ जो चौथी स्टेज में था। यह कैंसर फैलते हुए उनके मस्तिष्क तक जा पहुंचा था। मुझे पता था कि उनकी हालत ठीक नहीं है। इसलिए एयरपोर्ट उतरते ही मैंने मोगा अपने गांव खासो पांडो आने का फैसला लिया, लेकिन रास्ते में ही मुझे यह मनहूस खबर मिल गई।
तूर ने बताया कि उनके पिता कर्म सिंह (54) खुद भी रस्साकशी के अच्छे खिलाड़ी थे। उन्हें 2015 में स्किन कैंसर डाइग्नोज हुआ था। लेकिन मुसीबत यही खत्म नहीं हुई। एक साल बाद पिता को बोन कैंसर डाइग्नोज हुआ जो चौथी स्टेज में था। यह कैंसर फैलते हुए उनके मस्तिष्क तक जा पहुंचा था। मुझे पता था कि उनकी हालत ठीक नहीं है। इसलिए एयरपोर्ट उतरते ही मैंने मोगा अपने गांव खासो पांडो आने का फैसला लिया, लेकिन रास्ते में ही मुझे यह मनहूस खबर मिल गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
तेजिंदर पाल सिंह
परेशानियां में भी हमेशा दिया हौसला
तूर ने बताया कि पिता की सेहत के कारण वे हमेशा फिक्रमंद रहते थे। इसके कारण एशियाई खेलों में उनका ध्यान बार-बार भटक जाता था। फोन पर पिता से बातचीत के बाद उन्हें हौसला मिलता। तमाम परेशानियों के बावजूद उनके पिता ने उन्हें कभी रुकने नहीं दिया। हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे। उन्होंने मेडल तो जीत लिया लेकिन यह मेडल उनके पिता नहीं देख पाए इस बात का उन्हें हमेशा मलाल रहेगा। उनकी मां इस वक्त कनाडा में अपने दूसरे बेटे के पास गई हुई है। वहीं उनकी बहन अमेरिका में है। उनके आने पर ही 6 सितंबर को उनके पिता का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
तूर ने बताया कि पिता की सेहत के कारण वे हमेशा फिक्रमंद रहते थे। इसके कारण एशियाई खेलों में उनका ध्यान बार-बार भटक जाता था। फोन पर पिता से बातचीत के बाद उन्हें हौसला मिलता। तमाम परेशानियों के बावजूद उनके पिता ने उन्हें कभी रुकने नहीं दिया। हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे। उन्होंने मेडल तो जीत लिया लेकिन यह मेडल उनके पिता नहीं देख पाए इस बात का उन्हें हमेशा मलाल रहेगा। उनकी मां इस वक्त कनाडा में अपने दूसरे बेटे के पास गई हुई है। वहीं उनकी बहन अमेरिका में है। उनके आने पर ही 6 सितंबर को उनके पिता का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
विज्ञापन
तेजिंदर पाल सिंह
तूर बनना चाहते थे क्रिकेटर
23 वर्षीय लंबे-चौड़े एथलीट तेजिंदर पाल सिंह तूर ने बताया कि उनकी दिलचस्पी कभी भी शॉट पुट के खेल में आने की नहीं थी। वह मैदान में उतरे जरूर थे, लेकिन किसी और खेल के लिए। तेजिंदर क्रिकेटर बनना चाहते थे. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पिता के कहने पर ही उन्होंने शॉट पुट खेलना शुरू किया और ये उनकी जिंदगी का सबसे अच्छा निर्णय साबित हुआ। जकार्ता एशियन गेम्स में 20.75 मीटर दूर गोला फेंककर स्वर्ण पदक जीता, लेकिन सोचा न था कि यह मेडल उन्हें दिखा नहीं सकूंगा।
23 वर्षीय लंबे-चौड़े एथलीट तेजिंदर पाल सिंह तूर ने बताया कि उनकी दिलचस्पी कभी भी शॉट पुट के खेल में आने की नहीं थी। वह मैदान में उतरे जरूर थे, लेकिन किसी और खेल के लिए। तेजिंदर क्रिकेटर बनना चाहते थे. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पिता के कहने पर ही उन्होंने शॉट पुट खेलना शुरू किया और ये उनकी जिंदगी का सबसे अच्छा निर्णय साबित हुआ। जकार्ता एशियन गेम्स में 20.75 मीटर दूर गोला फेंककर स्वर्ण पदक जीता, लेकिन सोचा न था कि यह मेडल उन्हें दिखा नहीं सकूंगा।