देश में कबाड़ और ‘पत्थरों’ से जंगल में बनाई गई एक खूबसूरत दुनिया है, जो आज वर्ल्ड फेमस है। अब इस दुनिया में कला के फूल खिलने जा रहे हैं।
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रॉक गार्डन
- फोटो : फाइल फोटो
दरअसल, चंडीगढ़ के रॉक लेजेंड नेकचंद के सपनों का साकार रूप ले चुका रॉक गार्डन अब आर्ट्स स्टूडेंट्स की प्रतिभा को मंच देने का बड़ा जरिया बनने जा रहा है। साथ ही यहां विभिन्न कलाकारों को मंच प्रदान कर उनकी कला को भी हजारों पर्यटकों के समक्ष रखा जाएगा। ‘पत्थरों’ की इस दुनिया में ‘कला’ के फूल खिलाने की यह पहल चंडीगढ़ ललित कला अकादमी और रॉक गार्डन सोसायटी ने संयुक्त रूप से की है।
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रॉक गार्डन
- फोटो : फाइल फोटो
वहीं स्थानीय प्रशासन भी इसमें सहयोग करेगा। इस पहल का मकसद न केवल कलाकारों और कद्रदानों के बीच बन रही खाई को पाटना है, बल्कि कलाकारों व आटर्स स्टूडेंट्स की प्रतिभा को हजारों पर्यटकों के समक्ष प्रदर्शित कर उनकी कला का प्रचार दूर-दूर तक करना है। इस प्लानिंग के लिए ही रॉक गार्डन का चयन किया गया है।
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रॉक गार्डन
- फोटो : फाइल फोटो
रॉक गार्डन चंडीगढ़ के मुख्य आकर्षण केंद्रों में से एक है। यहां रोजाना औसतन पांच हजार से ज्यादा पयर्टक पत्थरों की शानदार कलाकृतियों को निहारने पहुंचते हैं। अगले हफ्ते से यह पहल होगी। अब इसी रॉक गार्डन को ‘कल्चर प्रमोट प्वाइंट’ बनाने की तैयारी है। रॉक गार्डन सोसायटी के कल्चर कोआर्डिनेटर कुलदीप शर्मा ने बताया कि यहां विभिन्न कॉलेजों व स्कूलों के फाइन आर्ट्स के छात्रों को विभिन्न दिनों में आमंत्रित किया जाएगा।
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रॉक गार्डन
- फोटो : फाइल फोटो
ये छात्र यहां अपनी विभिन्न तरह की कलाओं को प्रदर्शित करेंगे। इन छात्रों व कलाकारों के आने-जाने का किराया व रिफ्रेशमेंट का खर्च स्थानीय प्रशासन वहन करेगा। कुलदीप शर्मा ने बताया कि आज कला के प्रति कद्रदानों की संख्या कम होती जा रही है। कला के प्रति ये बेरुखी कलाकारों को भी झेलनी पड़ती है। उनका मानना है कि इसकी एक बड़ी वजह यह है कि आज लोग कला से और कलाकार अपने कद्रदानों से दूर होते जा रहे हैं।