पायलट बन न पाया पर खुद का हवाई जहाज बना डाला, देखिए
बचपन से एक ही सपना था, पायलट बन आसमान की उंचाई में उड़ना। इस सपने को पूरा करने के लिए उसने खुद ही बना डाला हवाई जहाज। तस्वीरों में देखिए छात्र के हौसले की उड़ान।
पायलट बन न पाया पर खुद का हवाई जहाज बना डाला, देखिए
बचपन से ही पायलट बन उड़ने का सपना संजोने वाले 2 छात्रों ने मौका मिलते ही खुद ही बना डाला मल्टीपपर्स हवाई जहाज। यह कमाल कर दिखाया है हरियाणा के गोहाना उपमंडल के गांव बुसाना के छोरे रवींद्र ने। अपने सपनों को नई उड़ान देते हुए रवींद्र ने चार फीट लंबा हवाई जहाज बनाया है। वीरवार को गांव मुंडलाना गोशाला में रवींद्र ने इस जहाज को लगभग 15 मिनट 150 की ऊंचाई तक उड़ाया और सुरक्षित लैंडिंग की।
पायलट बन न पाया पर खुद का हवाई जहाज बना डाला, देखिए
इस जहाज को देखने के लिए ग्रामीण गोशाला में उमड़ पड़े। गोशाला कमेटी ने रवींद्र की इस उपलब्धि पर उसे सम्मानित किया। बुसाना निवासी रवींद्र राठी ने बताया कि उसका बचपन से ही पायलेट बनने का सपना है और यह सपना पूरा होते तब दिखा जब सोनीपत के एएम स्कूल में उसे राहुल मान निवासी गांव बला जिला करनाल के साथा मुलाकात हुई। राहुल के भी वहीं सपने थे जो उसने बचपन से ही देखे थे।
पायलट बन न पाया पर खुद का हवाई जहाज बना डाला, देखिए
12वीं कक्षा तक उन्होंने उसी स्कूल में पढ़ाई की। पढ़ाई करते-करते 2011 में लकड़ी का जहाज बनाकर देखा। उसके बाद कुछ और करने की लालसा जागी तो कंप्यूटर साइंस से बीएसी करते-करते हवाई जहाज बनाने की भी रणनीति चलती रही। उन्होंने एक सप्लायर से करीब 40 हजार रुपये की लागत का हवाई जहाज का इंजन मंगवाया। रूस से इसकी लकड़ी मंगवाई गई। हवाई जहाज को बनाने के लिए लगभग एक वर्ष लगा।
पायलट बन न पाया पर खुद का हवाई जहाज बना डाला, देखिए
गत माह इसकी शुरुआत की गई। पहले इसे गांव में उड़ाकर देखा, जो कामयाब रहा। रवींद्र राठी व राहुल मान ने इस कामयाबी का श्रेय एनसीसी अध्यापक जगदीश सिंह कपिल को दिया है, जिन्होंने बारीकी से हवाई जहाज के बारे में सिखाया। राहुल ने करनाल व चंडीगढ़ में और रवींद्र ने हैदराबाद में एयप्लेनिंग की। इसके लिए दोनों को गोल्ड मेडल भी मिला है।