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10 से ज्यादा देशों में 14 नामों से पुकारा जाता है गुरु नानक देव जी को, पाकिस्तानी कहते 'नानकशाह'

Thu, 07 Nov 2019 09:04 AM IST
खुशबू गोयल महेश कुमार, अमर उजाला, सुल्तानपुर लोधी(कपूरथला)
महेश कुमार, अमर उजाला, सुल्तानपुर लोधी(कपूरथला) Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 07 Nov 2019 09:04 AM IST
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550th Prakash Parv, Guru Nanak Dev Life Based Exhibition by Punjab Government
गुरु नानक देव जी
प्रथम पातशाही श्री गुरु नानक देव जी को 10 से ज्यादा देशों में 14 नामों से पुकारा जाता है। पाकिस्तानी उन्हें नानकशाह कहते हैं, तो भारत के वे गुरु नानक देव जी हैं।
550th Prakash Parv, Guru Nanak Dev Life Based Exhibition by Punjab Government
गुरु नानक देव जी के जीवन पर आधारित प्रदर्शनी - फोटो : अमर उजाला
भाई मरदाना जी की रबाब की धुनों पर एक ओंकार में लीन बाबा नानक जी ने चार उदासियों में पूरी दुनिया में इस संदेश को पहुंचाया था, वो भी पैदल चलकर। इन उदासियों के दौरान वह जहां-जहां भी गए, वहां इन्हें अलग-अलग नामों से जाना गया।
550th Prakash Parv, Guru Nanak Dev Life Based Exhibition by Punjab Government
गुरु नानक देव जी के जीवन पर आधारित प्रदर्शनी - फोटो : अमर उजाला
प्रथम पातशाही भारत के लिए गुरु नानक साहिब हैं तो पाकिस्तान में नानकशाह के नाम से जाने जाते हैं। तिब्बत में यह नानकलामा से पुकारे गए तो रूस में नानक कमदार के तौर पर विख्यात हुए। करीब 10 से ज्यादा देशों में उदासी के दौरान गए बाबा नानक जी को 14 नामों से पुकारा जाता है।
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550th Prakash Parv, Guru Nanak Dev Life Based Exhibition by Punjab Government
गुरु नानक देव जी के जीवन पर आधारित प्रदर्शनी - फोटो : अमर उजाला
पर्यटन विभाग की ओर से गुरु नानक देव जी के जीवनकाल, उदासियों, खेती करने के और अंतिम समय से संबंधित दुर्लभ चित्र, हस्तलिखित जन्मसाखियों, सोने-चांदी सिक्कों और बाबा नानक जी की ओर से प्रयोग में लाए गए पुरातन बर्तनों की प्रदर्शनी लगाई गई है, जो संगत में विशेष आकर्षण केंद्र बनी हुई है।
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550th Prakash Parv, Guru Nanak Dev Life Based Exhibition by Punjab Government
गुरु नानक देव जी के जीवन पर आधारित प्रदर्शनी - फोटो : अमर उजाला
प्रदर्शनी में प्रस्तुत एक विशाल चित्र में उनकी उदासियों के दौरान अलग-अलग देशों में अलग-अलग नाम से पुकारे जाने की जानकारी बेहद खास है। इस चित्र में इन नामों का जिक्र होने के साथ भारत के लगभग 20 से अधिक सूबों में उनके जाने का विवरण भी अंकित है।
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