हरियाणा: सज्जन कुमार पर बयान से गरमाई कांग्रेस की सियासत, दीपेंद्र हुड्डा को सीडब्ल्यूसी से हटाने की मांग
पत्र में पंजाब विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए पूर्व विधायक कुलदीप शर्मा ने कहा कि चुनाव से पहले आया ऐसा बयान कांग्रेस के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हरियाणा कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आती दिख रही है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक कुलदीप शर्मा ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखकर सांसद और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य सांसद दीपेंद्र हुड्डा को कार्यसमिति से हटाने की मांग की है। यह मांग दिवंगत कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के संबंध में दीपेंद्र हुड्डा द्वारा रोल मॉडल बताने वाले दिए गए बयान को लेकर उठाई गई है।
23 अगस्त को लिखे पत्र में शर्मा ने कहा कि सज्जन कुमार को आदर्श के तौर पर प्रस्तुत किए जाने संबंधी टिप्पणी से सिख समुदाय में गहरी नाराजगी पैदा हुई है। उन्होंने लिखा कि हरियाणा और पंजाब के कुछ सिख मित्रों ने उनसे संपर्क कर इस बयान पर असंतोष जताया है।
शर्मा ने कांग्रेस अध्यक्ष को याद दिलाया कि किसान आंदोलन के बाद देश में सिख समुदाय के एक बड़े हिस्से ने कांग्रेस का समर्थन किया था। उनके अनुसार, ऐसे बयान से अब पार्टी के प्रति उस समर्थन को लेकर समुदाय में दोबारा विचार की स्थिति बन सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दल इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए उठा रहे हैं।
पत्र में पंजाब विधानसभा चुनाव का भी जिक्र करते हुए शर्मा ने कहा कि चुनाव से पहले आया ऐसा बयान कांग्रेस के लिए नुकसानदेह हो सकता है। उनका तर्क है कि इससे उस मुद्दे के पुराने घाव फिर खुल गए हैं, जिससे पार्टी पहले ही खुद को अलग कर चुकी है। कुलदीप शर्मा ने कहा कि कांग्रेस ने पूर्व में सज्जन कुमार से पूरी तरह दूरी बना ली थी।
ऐसे में पार्टी की स्थिति स्पष्ट करने और सिख समुदाय में पैदा हुई नाराजगी को कम करने के लिए दीपेंद्र हुड्डा को कांग्रेस कार्यसमिति से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने इसे पार्टी की गंभीरता और विश्वसनीयता प्रदर्शित करने वाला कदम बताया है।
कौन थे सज्जन सिंह?
सज्जन कुमार कांग्रेस पार्टी के पूर्व सांसद और दिल्ली के प्रभावशाली नेता थे। वे तीन बार लोकसभा सांसद चुने गए थे। वे 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए गए थे।
पिछले दो दिन से मैं देख रहा हूं कि मेरे बयान को घुमा-फिराकर लोगों के सामने पेश किए जा रहे हैं। मेरे बयान में एक ऐसा भी अंग्रेजी का शब्द डाला जा रहा है, जो मैंने बोला ही नहीं, न ही मेरा दूर-दूर तक ऐसा कोई मतलब था।
मेरी कोई भी मंशा किसी हमारे भाई को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। सिख समाज के हमारे भाइयों को तो ठेस पहुंचाने की मैं सोच भी नहीं सकता लेकिन फिर भी सिख समाज हमारा अपना परिवार है। अगर किसी भाई की भावनाओं को ठेस लगी है तो मैं आपका भाई हूं, मैं खेद प्रकट करता हूं। मेरी मंशा, मेरा मकसद किसी का दिल दुखी करना नहीं था।
सिख समाज हमारे देश का गौरवशाली समाज है और मुझे गर्व है ऐसे समाज पर, जिन्होंने हम सबके लिए जो कुर्बानियां दीं, उसको हम कभी भूल नहीं सकते। आज भी देश की सीमाओं की रक्षा हो, चाहे देश की आजादी की लड़ाई हो। सिख कौम ने देश के लिए जो कुर्बानियां दी हैं, उस पर हमें गर्व है।
जब 1908 में पंजाब में 'पगड़ी संभाल जट्टा' आंदोलन था, तो शहीद-ए-आज़म भगत सिंह जी के चाचा सरदार अजीत सिंह जी के साथ मेरे खुद के परदादा चौधरी मातूराम जी को काले पानी की सजा हुई थी। तब से लेकर जब किसान आंदोलन हुआ, जब पंजाब से हमारे किसान भाई आए, तो सबसे पहले उनके साथ मैं स्वयं पहुंचा और सन 84 में जो हुआ, सिख समाज के न्याय की उस लड़ाई में भी हम उनके साथ हैं। उनको न्याय मिलना चाहिए, कोई दोषी नहीं बचना चाहिए।