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MP Election 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की पांच चाल, जिनके आगे कहीं नहीं टिक सकी कांग्रेस
Mon, 04 Dec 2023 07:27 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Mon, 04 Dec 2023 07:27 PM IST
सार
भाजपा ने 100 दिन पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। पार्टी ने चुनावी जंग जीतने के लिए पांच चाल चली, जिन्हें डिकोड करने में कांग्रेस फेल हो गई।
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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत से जीत हासिल की है। इसके लिए भाजपा ने 100 दिन पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। पार्टी ने चुनावी जंग जीतने के लिए पांच चाल चली, जिन्हें डिकोड करने में कांग्रेस फेल हो गई। इसे ही भाजपा की जीत बताया जा रहा है। भाजपा ने अगस्त से चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी। इसके बाद वोटरों को घर से निकालने तक का मजबूत चुनावी प्रबंधन किया। इसी का कमाल है कि भाजपा ने 163 सीटों पर प्रचंड जीत दर्ज की।
अगस्त में केंद्रीय नेतृत्व की एंट्री, राव साइडलाइन किए गए
चुनाव के 100 दिन पहले से ही भाजपा ने अपनी चुनावी तैयारी शुरू कर दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत प्रदेश में केंद्रीय नेतृत्व की एंट्री हो गई थी। प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव को साइडलाइन कर दिया गया। शाह ने लगातार पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के साथ मैराथन बैठकें की। उनके खास केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादस को एमपी चुनाव प्रभारी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भोपाल में ही डेरा डाला और रणनीति बनाने से लेकर उसके क्रियान्वयन में जुटे रहे।
हारी सीटों पर चार माह पहले प्रत्याशी उतारे
भाजपा ने चुनाव रणनीति में कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए चार माह पहले हारी सीटों पर सबसे पहले 39 प्रत्याशी उतार दिए। इनमें से कई सीटों पर भाजपा लगातार जीतते आ रही थी। यहां पर क्षेत्रीय और जातिगत समीकरण के साथ प्रत्याशियों को चयन किया गया। इससे प्रत्याशियों को काम करने का मौका मिला और टिकट से नाराज कार्यकर्ताओं को भी समझाने के लिए पर्याप्त समय मिल गया। इसका परिणाम यह हुआ कि 24 सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की।
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दिग्गजों को उतार कर चौंकाया
भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने चुनाव की कमान संभालते ही शिवराज सिंह चौहान को रणनीतिक रूप से शुरुआत में दूर रखा गया। इसके लिए तीन केंद्रीय समेत सात सांसदों को उतार कर यह संदेश दिया गया कि प्रदेश में कोई सीएम का चेहरा नहीं है। दिग्गजों को चुनाव मैदान में उतारने से सीएम शिवराज पर हमलावर कांग्रेस भौचक रह गई और क्या करें क्या ना करें वाली स्थिति में आ गई। भाजपा के दिग्गजों के जिलों में पार्टी को बड़ी जीत मिली।
घोषणा पत्र धनतेरस के एक दिन पहले
कांग्रेस के अपना वचन पत्र जारी करने के बाद भाजपा ने अपना संकल्प पत्र जारी करने में जल्दबाजी नहीं दिखाई। भाजपा ने चुनाव से एक सप्ताह पहले और धनतेरस के एक दिन पहले अपना संकल्प पत्र जारी किया। जिससे कि उसके वादे और योजनाएं याद रहें और उनकी चर्चा हो। नतीजा महिला, किसान, युवा हर वर्ग ने भाजपा पर भरोसा जताया।
वोटिंग बढ़ाने संगठन ने झोंकी ताकत
इस बार भाजपा ने वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए मजबूत चुनावी प्रबंधन किया। इसके लिए कार्यकर्ताओं को टेक्नोलॉजी से अपडेट करने के साथ ही 19 लाख पन्ना प्रमुखों को सक्रिय कर दिया। एक-एक वोट की मार्किंग की गई। इस रणनीति को ऐसे समझें कि मतदान के दिन भाजपा ने कार्यकर्ताओं को सुबह 6 बजे फोन लगाकर उठाने से लेकर मतदान प्रतिशत बढ़ाने के मैसेज भेजने को भी अपनी सूची में शामिल किया। इसका नतीजा है कि भाजपा को पिछली बार से 7.73 प्रतिशत अधिक यानी 48.55 प्रतिशत वोट मिले।
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अगस्त में केंद्रीय नेतृत्व की एंट्री, राव साइडलाइन किए गए
चुनाव के 100 दिन पहले से ही भाजपा ने अपनी चुनावी तैयारी शुरू कर दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत प्रदेश में केंद्रीय नेतृत्व की एंट्री हो गई थी। प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव को साइडलाइन कर दिया गया। शाह ने लगातार पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के साथ मैराथन बैठकें की। उनके खास केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादस को एमपी चुनाव प्रभारी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भोपाल में ही डेरा डाला और रणनीति बनाने से लेकर उसके क्रियान्वयन में जुटे रहे।
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हारी सीटों पर चार माह पहले प्रत्याशी उतारे
भाजपा ने चुनाव रणनीति में कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए चार माह पहले हारी सीटों पर सबसे पहले 39 प्रत्याशी उतार दिए। इनमें से कई सीटों पर भाजपा लगातार जीतते आ रही थी। यहां पर क्षेत्रीय और जातिगत समीकरण के साथ प्रत्याशियों को चयन किया गया। इससे प्रत्याशियों को काम करने का मौका मिला और टिकट से नाराज कार्यकर्ताओं को भी समझाने के लिए पर्याप्त समय मिल गया। इसका परिणाम यह हुआ कि 24 सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की।
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दिग्गजों को उतार कर चौंकाया
भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने चुनाव की कमान संभालते ही शिवराज सिंह चौहान को रणनीतिक रूप से शुरुआत में दूर रखा गया। इसके लिए तीन केंद्रीय समेत सात सांसदों को उतार कर यह संदेश दिया गया कि प्रदेश में कोई सीएम का चेहरा नहीं है। दिग्गजों को चुनाव मैदान में उतारने से सीएम शिवराज पर हमलावर कांग्रेस भौचक रह गई और क्या करें क्या ना करें वाली स्थिति में आ गई। भाजपा के दिग्गजों के जिलों में पार्टी को बड़ी जीत मिली।
घोषणा पत्र धनतेरस के एक दिन पहले
कांग्रेस के अपना वचन पत्र जारी करने के बाद भाजपा ने अपना संकल्प पत्र जारी करने में जल्दबाजी नहीं दिखाई। भाजपा ने चुनाव से एक सप्ताह पहले और धनतेरस के एक दिन पहले अपना संकल्प पत्र जारी किया। जिससे कि उसके वादे और योजनाएं याद रहें और उनकी चर्चा हो। नतीजा महिला, किसान, युवा हर वर्ग ने भाजपा पर भरोसा जताया।
वोटिंग बढ़ाने संगठन ने झोंकी ताकत
इस बार भाजपा ने वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए मजबूत चुनावी प्रबंधन किया। इसके लिए कार्यकर्ताओं को टेक्नोलॉजी से अपडेट करने के साथ ही 19 लाख पन्ना प्रमुखों को सक्रिय कर दिया। एक-एक वोट की मार्किंग की गई। इस रणनीति को ऐसे समझें कि मतदान के दिन भाजपा ने कार्यकर्ताओं को सुबह 6 बजे फोन लगाकर उठाने से लेकर मतदान प्रतिशत बढ़ाने के मैसेज भेजने को भी अपनी सूची में शामिल किया। इसका नतीजा है कि भाजपा को पिछली बार से 7.73 प्रतिशत अधिक यानी 48.55 प्रतिशत वोट मिले।
