फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Khargone News Rajrajeshwar pagoda of Maheshwar center of faith for devotees in the month of Sawan

Khargone News: महेश्वर का राजराजेश्वर शिवालय, सावन महीने में श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र

Tue, 11 Jul 2023 05:57 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 11 Jul 2023 05:57 PM IST
सार

मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में स्थित महेश्वर नगरी शिव महिमा की पावन गाथा है। सुरम्य घाट और कलात्मक शिवालयों का जैसे मेला लगा हो। पावन श्रावण मास में यह शिवालय श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है।

विज्ञापन
Khargone News Rajrajeshwar pagoda of Maheshwar center of faith for devotees in the month of Sawan
महेश्वर का राजराजेश्वर शिवालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महेश्वर में शिव आराधना की परम्परा यूं तो प्राचीन है, मगर शिव भक्त देवी अहिल्या बाई होल्कर की भक्ति ने महेश्वर तीर्थ को शिवमय बना दिया है। शिवालयों में यहां का  राजराजेश्वर मंदिर हजारों श्रध्दालुओं की अगाध श्रध्दा का केंद्र है। महान प्रतापी सम्राट सहस्त्रार्जुन की समाधि स्थल इस शिवालय में ग्यारह अखंड दीपक शताब्दियों से ज्योतित हैं। 

विज्ञापन


शुद्ध घी से अहर्निश जगमगाने वाले यह दीपक दर्शन से दीर्घायु और यश आरोग्य प्रदान करते हैं। संभवतः यह देश का एक मात्र शिवालय है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर रजत नाग सुशोभित है। प्राचीन शिवलिंग भी रजत मंडित हो गई है। मंदिर परिसर में शिव पंचायतन मंदिर रूप में शोभत है। अष्टधातु की भगवान सहस्त्रार्जुन की सपत्निक पूर्ति विराजित है, जिनका निर्माण दक्षिणात्य शैली में है। श्री गणेश जी, आद्यशक्ति जगदम्बा की प्रतिमाओं के साथ सम्राट सहस्त्रबाहु के गुरूदेव दत्त भगवान का चित्र भी है। 27 शिवालय की दिव्यता और भव्यता कहती यह निर्माण हजारो वर्ष पूर्व का है।
विज्ञापन


महारानी अहिल्या जी ने जीर्णोध्दार करवाया था। विद्वान ब्राह्मणों के वैदिक स्वर निरंतर यहां गूंजते हैं। देवी यहां दर्शन को आती थी। उसी परंपरा का निर्वाह आज भी देवी अहिल्या जी की पालकी प्रति सोमवार दर्शन को यहां आती है। यहां दर्शन से राजनीतिज्ञों का राजयोग की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन




महंत चेतन गिरी ने कहा, श्री राजराजेश्वर मंदिर महेश्वर में सेवा करते हुए आठवीं पीढ़ी में हूं। हमारे पूर्वज प्रथम श्री सुजान गिरी गोस्वामी ने राजराजेश्वर श्री राजराजेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार किया था। यहां पर सदियों से शुद्ध घी के अखंड 11 दीपक अनवरत जल रहे हैं। यहां पर शिवलिंग पर तुलसी भी चढ़ाई जाती है। इस मंदिर में दीपक पत्थर के बने हुए हैं, जो दीवार में लगे हुए हैं। यह मंदिर का आरती वीर सहस्त्रार्जुन का है, जो कि त्रेता युग में हुए थे।

भगवान कार्तिकेय सहस्त्रार्जुन सुदर्शन चक्र के अवतार थे। दीपक जलाने से भगवान कार्तिक वीर्य सहस्त्रार्जुन प्रसन्न होते हैं। इसलिए यह 11 दीपक यहां पर अनवरत जल रहे हैं। मंत्र महोदधि नामक पुस्तक में लिखा है, सहस्त्रार्जुन भगवान को दीपक प्रिय है। इसलिए यह 11 अखंड ज्योति जल रही है। इन्होंने रावण को युद्ध में जीत कर यहां पर कैद करके रखा था। 


ऐसा कहा जाता है कि शाम के समय रावण को बाहर निकाल कर उसके 10 मुख पर 10 दीपक जलाए जाते थे और एक हाथ में रखा जाता था। इसलिए बताते हैं कि यह 11 दीपक जल रहे हैं। हमारे पूर्वज सुजानगढ़ बाबा ने जब इस मंदिर का निर्माण किया, तब वह मजदूरी के रूप में मजदूरों को एक नीम की गाड़ी दे दिया करते थे। जो कि जिसकी जितनी मेहनत रहती थी, उस रूप में सोने की हो जाया करती थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed