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भोपाल में आरएसएस का एकत्रीकरण: होसबाले बोले-जागृत और संगठित समाज ही देश को आगे बढ़ाएगा, जातिभेद-छुआछूत खत्म हो
Sun, 20 Sep 2026 07:29 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sun, 20 Sep 2026 07:29 PM IST
सार
भोपाल में संघ के शताब्दी वर्ष के तहत हुए शाखा संगम में करीब 30 हजार स्वयंसेवक जुटे। सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने जागृत और संगठित समाज को देश की प्रगति के लिए जरूरी बताते हुए सामाजिक समरसता, जातिभेद खत्म करने, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य निभाने पर जोर दिया।
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लाल परेड ग्राउंड में शाखा संगम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के तहत रविवार को राजधानी के लाल परेड ग्राउंड में शाखा संगम और स्वयंसेवक एकत्रीकरण हुआ। इसमें भोपाल विभाग के पांच जिलों से करीब 30 हजार स्वयंसेवक शामिल हुए। स्वयंसेवकों ने शारीरिक कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया। संघ गीत और घोष वादन भी हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि जागृत और संगठित समाज ही देश को आगे बढ़ा सकता है। समाज के अलग-अलग वर्गों को यह समझना होगा कि उसके सामने आने वाली समस्याएं किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की हैं। उन्होंने नागरिकों से कानून के डर से नहीं, बल्कि अपने कर्तव्य और जिम्मेदारी को समझकर काम करने का आह्वान किया।
जातिभेद और छुआछूत खत्म करने पर जोर
होसबाले ने कहा कि जन्म के आधार पर भेदभाव हिंदू समाज का हिस्सा नहीं है। जाति के नाम पर होने वाला दुर्व्यवहार समाज को कमजोर करता है। जातिभेद और छुआछूत खत्म करने की शुरुआत अपने घर और व्यवहार से करनी होगी। उन्होंने कहा कि केवल मंच से बात करने से बदलाव नहीं आएगा, इसके लिए व्यवहार में परिवर्तन जरूरी है।
उन्होंने संघ के पंच परिवर्तन का उल्लेख करते हुए सामाजिक समरसता, परिवार और संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, आत्मबोध और नागरिक कर्तव्य जैसे विषयों पर काम करने की बात कही।
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पर्यावरण के लिए रोजमर्रा के व्यवहार में बदलाव जरूरी
होसबाले ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल प्रस्ताव पारित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। घर, स्कूल, बाजार, कार्यस्थल और बस्ती में भी पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभानी होगी। पौधे लगाने के साथ ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल कम करने पर ध्यान देना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए संसाधन सुरक्षित रहें।
असम की बाढ़ का उदाहरण देकर समाज की भागीदारी बताई
उन्होंने असम की बाढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि सेवा भारती के स्वयंसेवक राहत कार्य के लिए पहुंचे थे, लेकिन इस बार समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग भी बड़ी संख्या में सामने आए। युवा, कॉलेज विद्यार्थी और अन्य लोग प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आए। होसबाले ने कहा कि केवल संघ के स्वयंसेवक ही सेवा करें, ऐसा नहीं है। संकट के समय समाज के हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
गांव और बस्ती के विकास में समाज की भूमिका
होसबाले ने महामना मदन मोहन मालवीय का उदाहरण देते हुए कहा कि गांव और बस्ती की समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी केवल शासन-प्रशासन की नहीं है। वहां रहने वाले लोगों को भी अपने स्तर पर जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि गांव-मोहल्लों में लोग नियमित रूप से एकत्र हों, स्थानीय समस्याओं पर चर्चा करें और समाधान के लिए मिलकर काम करें। नई पीढ़ी को रामायण, महाभारत, संतों की वाणी और गुरुओं के उपदेशों से संस्कार देने की जरूरत भी बताई।
भारत हर संकट के बाद खड़ा हुआ
होसबाले ने कहा कि भारत की करीब पांच हजार साल की सभ्यता की यात्रा में कई संकट और संघर्ष आए, लेकिन देश हर संकट के बाद खड़ा हुआ। उन्होंने कहा कि समस्याएं आना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उनका सामना करने की क्षमता समाज में होना जरूरी है। उन्होंने हनुमान के प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार समाज अपनी शक्ति को भूल जाता है। ऐसे समय उसे अपनी सामर्थ्य का बोध कराने की जरूरत होती है। संगठन के जरिए समाज की शक्ति को जागृत किया जा सकता है।
यह भी पढ़ें-आरएसएस का भोपाल में बड़ा कार्यक्रम: लाल परेड ग्राउंड में 30 हजार स्वयंसेवक, दत्तात्रेय होसबाले मुख्य वक्ता
देशभक्ति केवल किसी एक दिन का भाव नहीं
उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल 26 जनवरी या किसी विशेष दिन तक सीमित नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक नागरिक को 24 घंटे यह विचार करना चाहिए कि वह अपने गांव, मोहल्ले और समाज के लिए क्या कर सकता है। होसबाले ने कहा कि संघ की शाखाएं व्यक्ति निर्माण और समाज को संगठित करने का प्रयास करती हैं। इसके लिए निरंतरता और अनुशासन जरूरी है। उनका कहना था कि समाज को संगठित करना सरल है, लेकिन इसे रोज करना आसान नहीं है।
संकट में बिना भेदभाव मदद करना राष्ट्र सेवा
कार्यक्रम में एम्स भोपाल के निदेशक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नरेंद्र कोतवाल ने कहा कि देश में संकट के समय स्वयंसेवक बिना भेदभाव के मदद के लिए आगे आते हैं। पीड़ित की जाति, भाषा, क्षेत्र या धर्म पूछने के बजाय उसकी जरूरत को देखना ही सेवा का भाव है। उन्होंने वसुधैव कुटुम्बकम् का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति पूरे विश्व को एक परिवार मानती है। उन्होंने सामाजिक समरसता, परिवार और संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, आत्मनिर्भरता और नागरिक कर्तव्य पर ध्यान देने की बात कही।
यह भी पढ़ें-20 सितंबर से 20 ट्रेनें रद्द: बीना यार्ड रीमॉडलिंग का असर, भोपाल-ग्वालियर इंटरसिटी, श्रीधाम और राज्यरानी शामिल
सुबह से बैठकों में व्यस्त रहे होसबाले
मुख्य कार्यक्रम से पहले दत्तात्रेय होसबाले ने ई-8 अरेरा कॉलोनी स्थित समाज सेवा न्यास में संघ से जुड़े अलग-अलग समूहों के साथ बैठकें कीं। उन्होंने श्रेणी मिलन की टोलियों और संघ विकास मंडली की बैठक में भी हिस्सा लिया। शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित इस एकत्रीकरण में संघ की नियमित शाखाओं के वृहद स्वरूप को सामने रखा गया। आयोजन के जरिए सामाजिक कार्यों और आगामी संकल्पों का संदेश भी दिया गया।
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जातिभेद और छुआछूत खत्म करने पर जोर
होसबाले ने कहा कि जन्म के आधार पर भेदभाव हिंदू समाज का हिस्सा नहीं है। जाति के नाम पर होने वाला दुर्व्यवहार समाज को कमजोर करता है। जातिभेद और छुआछूत खत्म करने की शुरुआत अपने घर और व्यवहार से करनी होगी। उन्होंने कहा कि केवल मंच से बात करने से बदलाव नहीं आएगा, इसके लिए व्यवहार में परिवर्तन जरूरी है।
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उन्होंने संघ के पंच परिवर्तन का उल्लेख करते हुए सामाजिक समरसता, परिवार और संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, आत्मबोध और नागरिक कर्तव्य जैसे विषयों पर काम करने की बात कही।
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पर्यावरण के लिए रोजमर्रा के व्यवहार में बदलाव जरूरी
होसबाले ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल प्रस्ताव पारित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। घर, स्कूल, बाजार, कार्यस्थल और बस्ती में भी पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभानी होगी। पौधे लगाने के साथ ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल कम करने पर ध्यान देना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए संसाधन सुरक्षित रहें।
असम की बाढ़ का उदाहरण देकर समाज की भागीदारी बताई
उन्होंने असम की बाढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि सेवा भारती के स्वयंसेवक राहत कार्य के लिए पहुंचे थे, लेकिन इस बार समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग भी बड़ी संख्या में सामने आए। युवा, कॉलेज विद्यार्थी और अन्य लोग प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आए। होसबाले ने कहा कि केवल संघ के स्वयंसेवक ही सेवा करें, ऐसा नहीं है। संकट के समय समाज के हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
गांव और बस्ती के विकास में समाज की भूमिका
होसबाले ने महामना मदन मोहन मालवीय का उदाहरण देते हुए कहा कि गांव और बस्ती की समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी केवल शासन-प्रशासन की नहीं है। वहां रहने वाले लोगों को भी अपने स्तर पर जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि गांव-मोहल्लों में लोग नियमित रूप से एकत्र हों, स्थानीय समस्याओं पर चर्चा करें और समाधान के लिए मिलकर काम करें। नई पीढ़ी को रामायण, महाभारत, संतों की वाणी और गुरुओं के उपदेशों से संस्कार देने की जरूरत भी बताई।
भारत हर संकट के बाद खड़ा हुआ
होसबाले ने कहा कि भारत की करीब पांच हजार साल की सभ्यता की यात्रा में कई संकट और संघर्ष आए, लेकिन देश हर संकट के बाद खड़ा हुआ। उन्होंने कहा कि समस्याएं आना महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उनका सामना करने की क्षमता समाज में होना जरूरी है। उन्होंने हनुमान के प्रसंग का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार समाज अपनी शक्ति को भूल जाता है। ऐसे समय उसे अपनी सामर्थ्य का बोध कराने की जरूरत होती है। संगठन के जरिए समाज की शक्ति को जागृत किया जा सकता है।
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देशभक्ति केवल किसी एक दिन का भाव नहीं
उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल 26 जनवरी या किसी विशेष दिन तक सीमित नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक नागरिक को 24 घंटे यह विचार करना चाहिए कि वह अपने गांव, मोहल्ले और समाज के लिए क्या कर सकता है। होसबाले ने कहा कि संघ की शाखाएं व्यक्ति निर्माण और समाज को संगठित करने का प्रयास करती हैं। इसके लिए निरंतरता और अनुशासन जरूरी है। उनका कहना था कि समाज को संगठित करना सरल है, लेकिन इसे रोज करना आसान नहीं है।
संकट में बिना भेदभाव मदद करना राष्ट्र सेवा
कार्यक्रम में एम्स भोपाल के निदेशक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नरेंद्र कोतवाल ने कहा कि देश में संकट के समय स्वयंसेवक बिना भेदभाव के मदद के लिए आगे आते हैं। पीड़ित की जाति, भाषा, क्षेत्र या धर्म पूछने के बजाय उसकी जरूरत को देखना ही सेवा का भाव है। उन्होंने वसुधैव कुटुम्बकम् का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति पूरे विश्व को एक परिवार मानती है। उन्होंने सामाजिक समरसता, परिवार और संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, आत्मनिर्भरता और नागरिक कर्तव्य पर ध्यान देने की बात कही।
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सुबह से बैठकों में व्यस्त रहे होसबाले
मुख्य कार्यक्रम से पहले दत्तात्रेय होसबाले ने ई-8 अरेरा कॉलोनी स्थित समाज सेवा न्यास में संघ से जुड़े अलग-अलग समूहों के साथ बैठकें कीं। उन्होंने श्रेणी मिलन की टोलियों और संघ विकास मंडली की बैठक में भी हिस्सा लिया। शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित इस एकत्रीकरण में संघ की नियमित शाखाओं के वृहद स्वरूप को सामने रखा गया। आयोजन के जरिए सामाजिक कार्यों और आगामी संकल्पों का संदेश भी दिया गया।
