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मध्यप्रदेश: बोत्सवाना से आई CCB-2 को मिला ‘राधा’ नाम, गांधी सागर में अब दो नर और दो मादा; MP में 56 चीते

Sun, 20 Sep 2026 05:56 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Sun, 20 Sep 2026 05:56 PM IST
सार

कूनो के बाद अब गांधी सागर में भी चीता कुनबा बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बोत्सवाना से आई मादा चीता CCB-2 को ‘राधा’ नाम देकर गांधी सागर में छोड़ा गया, जिसके बाद यहां चीतों की संख्या चार हो गई।

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Botswana Cheetah CCB-2 Named Radha, Released in Gandhi Sagar; MP Now Has 56 Cheetahs
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गांधी सागर में मादा चीता का छोड़ा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण अब एक ही ठिकाने तक सीमित नहीं रह गया है। कूनो के बाद गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में भी चीतों का समूह तैयार किया जा रहा है। इसी कड़ी में रविवार को बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता CCB-2 को गांधी सागर में छोड़ा गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुद बाड़े का गेट खोलकर उसे नए आवास में प्रवेश कराया और उसका नाम ‘राधा’ रखा। राधा के आने के बाद गांधी सागर में चीतों की संख्या चार हो गई है। यहां अब दो नर और दो मादा हैं। अधिकारियों के अनुसार, अलग-अलग सुरक्षित क्षेत्रों में चीतों को बसाने का मकसद प्रोजेक्ट को विस्तार देना और भविष्य में उनकी आबादी बढ़ाने के लिए नए क्षेत्र तैयार करना है।
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बोत्सवाना से आई, अब गांधी सागर बना नया घर
CCB-2 को इसी साल 28 फरवरी को बोत्सवाना से भारत लाया गया था। भारत आने के बाद उसे कुछ समय क्वारंटीन में रखा गया। इसके बाद पर्यावरण के अनुकूल बनाने की प्रक्रिया पूरी की गई और मई में उसे कूनो के जंगल में छोड़ा गया। कुछ समय कूनो में रहने के बाद अब उसे गांधी सागर भेजा गया है। यहां उसे नए वातावरण में रखा गया और रविवार को बाड़े से बाहर निकालकर अभयारण्य के निर्धारित क्षेत्र में छोड़ा गया। 
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चार चीतों के साथ तैयार हुआ नया समूह
गांधी सागर में पहले से प्रभाष और पावक नाम के दो नर तथा धीरा नाम की एक मादा मौजूद थी। अब राधा के आने से यहां नर-मादा का अनुपात दो-दो हो गया है। नई मादा की मौजूदगी को गांधी सागर में भविष्य में चीता प्रजनन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि इसका वास्तविक परिणाम आने वाले समय में ही सामने आएगा। 

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चार साल में बदल गई तस्वीर
भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत सितंबर 2022 में नामीबिया से आए आठ चीतों के साथ हुई थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से भी चीते भारत लाए गए। अब मध्यप्रदेश इस अभियान का प्रमुख केंद्र बन चुका है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि एक समय एशिया और मध्यप्रदेश से चीते विलुप्त हो गए थे। आज मध्यप्रदेश की धरती पर उनका फिर से स्वच्छंद विचरण करना संरक्षण प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनके मुताबिक प्रदेश में वर्तमान में 56 चीते और उनके शावक मौजूद हैं। उन्होंने इसे वन्यजीवों के प्रति ‘जियो और जीने दो’ की भावना का उदाहरण बताते हुए वन विभाग की टीम को बधाई दी।

कूनो से गांधी सागर तक फैल रहा दायरा
प्रोजेक्ट चीता का अगला बड़ा लक्ष्य चीतों को एक से अधिक सुरक्षित इलाकों में स्थापित करना है। गांधी सागर में नए चीते को बसाया जाना इसी दिशा में बढ़ता कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश का वन्यजीव संरक्षण का लंबा इतिहास रहा है। चीतों की वापसी प्रदेश की जैव-विविधता और प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों को भी मजबूती देती है। अब गांधी सागर में चार चीतों का समूह बनने के साथ यहां आने वाले समय में चीता संरक्षण और संभावित प्रजनन गतिविधियों पर नजर रहेगी।
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