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Bhopal News: निगम ही नहीं अब हर नागरिक जिम्मेदार, चार डस्टबिन रखो वरना जुर्माना भरो, पाठ्यक्रम में शामिल होगा

Sat, 21 Feb 2026 06:32 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Sat, 21 Feb 2026 06:32 PM IST
सार

आदमपुर कचरा खंती मामले में आए आदेश पर पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पाण्डेय ने इसे देश की कचरा व्यवस्था में बड़ा बदलाव बताया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केवल एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में कचरा प्रबंधन की तस्वीर बदलने वाला है। अब कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल नगर निगम की नहीं, बल्कि हर नागरिक की होगी। 

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Bhopal News: Not only the corporation, now every citizen is responsible, keep four dustbins or else pay the fi
डस्टबिन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार आग लगने के मामले पर सुपीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश को लेकर पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी .पाण्डेय ने इसे देश की कचरा व्यवस्था में बड़ा बदलाव बताया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केवल एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में कचरा प्रबंधन की तस्वीर बदलने वाला है। डॉ. पांडे ने बताया कि अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि कचरा पैदा करने वाला हर व्यक्ति उसकी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। अब घर से निकलने वाले कचरे की छंटाई घर पर ही करना अनिवार्य होगा। हर परिवार को चार अलग-अलग डस्टबिन रखने होंगे गीले कचरे, सूखे कचरे, सेनेटरी कचरे और इलेक्ट्रॉनिक कचरे के लिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई परिवार कचरे को अलग-अलग नहीं देगा तो नगर निगम के कर्मचारी मौके पर ही जुर्माना लगा सकेंगे। यह व्यवस्था केवल नागरिकों तक सीमित नहीं है। यदि कर्मचारी या संबंधित अधिकारी नियमों को लागू करने में लापरवाही करते हैं तो उनके खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई होगी। यानी अब जवाबदेही दोनों तरफ तय होगी।
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अफसर से लेकर जनप्रतिनिधि तक जिम्मेदार
डॉ.. पाण्डेय के अनुसार अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि बिना छंटाई के कचरा डंपिंग स्थल तक पहुंचता है तो संबंधित अधिकारी, पार्षद और जिम्मेदार व्यक्तियों पर भी कार्रवाई होगी। बड़े मॉल, अस्पताल, शिक्षण संस्थान और अन्य प्रतिष्ठानों को अपने स्तर पर कचरे का निपटान करना होगा। उन्हें यह जानकारी केंद्र सरकार के पोर्टल पर दर्ज करनी होगी कि उन्होंने अपने कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन किया है। जरूरत पड़ने पर राज्य सरकारें सख्त नियम बना सकती हैं और गंभीर लापरवाही की स्थिति में आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किए जा सकते हैं।
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अब स्कूलों में भी पढ़ाई जाएगी कचरा प्रबंधन
डॉ पाण्डेय ने बताया कि अदालत ने कचरा प्रबंधन को शिक्षा से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। अब स्कूल और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में इसे अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। बच्चों को शुरू से ही सिखाया जाएगा कि कचरे को अलग करना क्यों जरूरी है, गीले और सूखे कचरे में क्या अंतर है, और गलत तरीके से फेंके गए कचरे से पर्यावरण और स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है। बेहतर काम करने वाले स्कूलों और कॉलेजों को सम्मानित करने की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि इसे एक जनअभियान का रूप दिया जा सके।

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तीन स्तर पर सख्त निगरानी
डॉ. पाण्डेय के मुताबिक इस व्यवस्था की निगरानी तीन स्तरों पर होगी मुख्य सचिव, जिला कलेक्टर और ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकारी। यानी राज्य से लेकर गांव तक पूरी प्रशासनिक श्रृंखला जिम्मेदार होगी। उन्होंने कहा, अब यह स्पष्ट हो गया है कि कचरा केवल नगर निगम का विषय नहीं है। हर घर, हर संस्था और हर अधिकारी को जवाबदेह बनाया गया है। यदि नियमों का सख्ती से पालन हुआ तो देश में डंपिंग स्थलों पर लगने वाली आग और पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर काफी हद तक रोक लग सकेगी। इस फैसले के बाद साफ संकेत है कि आने वाले समय में कचरा प्रबंधन को लेकर देशभर में सख्ती बढ़ेगी और लापरवाही करने वालों पर सीधे कार्रवाई होगी।
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