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UP: राज्यकर विभाग को 4.17 करोड़ की चपत लगाने वाले दो जालसाज गिरफ्तार, फर्जी फर्म के जरिये आईटीसी जारी की
Tue, 21 Jul 2026 11:22 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Tue, 21 Jul 2026 11:22 PM IST
सार
मामले में फर्म से फर्जी तरीके से 4.17 करोड़ रुपये का आईटीसी जनरेट कर इसे खरीदारों को पास किया गया। इसके लिए पवन ने अपने आधार और पैन कार्ड का उपयोग किया। इसकी एफआईआर मुरादाबाद के मुगलपुरा थाने में दर्ज कराई गई थी
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गिरफ्तार किए गए आरोपी।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) की टीम ने राज्यकर विभाग को 4.17 करोड़ रुपये की चपत लगाने वाले दो वांछितों को मंगलवार को मेरठ से गिरफ्तार किया है। दोनों ने फर्जी फर्म के जरिये कूटरचित इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) जारी किया था।
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डीजी ईओडब्ल्यू जेएन सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों दिल्ली के पवन राघव और मोहित कुमार ने वर्ष 2024 में मैसर्स राघव एंटरप्राइजेज नाम की एक फर्जी फर्म का पंजीयन कराया जो मुगलपुरा मुरादाबाद में पंजीकृत थी। फर्म से फर्जी तरीके से 4.17 करोड़ रुपये का आईटीसी जनरेट कर इसे खरीदारों को पास किया गया। इसके लिए पवन ने अपने आधार और पैन कार्ड का उपयोग किया। इस मामले की एफआईआर मुरादाबाद के मुगलपुरा थाने में दर्ज कराई गई थी जिसकी जांच ईओडब्ल्यू को ट्रांसफर हुई थी।
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छात्रवृत्ति हड़पने वाला प्रबंधक गिरफ्तार
ईओडब्ल्यू ने करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति का गबन करने वाले इटावा के संत बीडीएस पब्लिक स्कूल के तत्कालीन प्रबंधक लाल सिंह को गिरफ्तार किया है। उसे इटावा की फ्रेंड्स कॉलोनी से पकड़ने के बाद अदालत में पेश किया गया जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
ईओडब्ल्यू के मुताबिक वर्ष 2008-09 के दौरान एससी, ओबीसी, अल्पसंख्यक और सामान्य वर्ग के छात्रों की फर्जी संख्या दर्शाकर अस्तित्वहीन 27 विद्यालयों के प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों ने एक करोड़ की छात्रवृत्ति का गबन किया था। विवेचना ईओडब्ल्यू कानपुर सेक्टर को सौंपी गई थी। जांच में सामने आया कि तत्कालीन प्रबंधक इटावा के लाल सिंह ने फर्जी मांग पत्र तैयार कर छात्रवृत्ति हड़पी थी।
ईओडब्ल्यू के मुताबिक वर्ष 2008-09 के दौरान एससी, ओबीसी, अल्पसंख्यक और सामान्य वर्ग के छात्रों की फर्जी संख्या दर्शाकर अस्तित्वहीन 27 विद्यालयों के प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों ने एक करोड़ की छात्रवृत्ति का गबन किया था। विवेचना ईओडब्ल्यू कानपुर सेक्टर को सौंपी गई थी। जांच में सामने आया कि तत्कालीन प्रबंधक इटावा के लाल सिंह ने फर्जी मांग पत्र तैयार कर छात्रवृत्ति हड़पी थी।