फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Pan Masala industry in turmoil due to new tax regime, revenue drops by 70 percent.

UP: नई कर व्यवस्था से पान मसाला उद्योग में उथल-पुथल, 70% तक गिरा राजस्व, एक हजार से मात्र 300 करोड़ रह गया

Fri, 16 Jan 2026 11:18 AM IST
ishwar ashish अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 16 Jan 2026 11:18 AM IST
विज्ञापन
UP: Pan Masala industry in turmoil due to new tax regime, revenue drops by 70 percent.
- फोटो : amar ujala

उत्तर प्रदेश में 1 फरवरी से लागू होने जा रही नई कर व्यवस्था ने पान मसाला उद्योग के साथ-साथ राज्य सरकार की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। जिस प्रणाली से कर राजस्व बढ़ने की उम्मीद की जा रही थी, उसके उलट परिणाम सामने आने की आशंका जताई जा रही है। वित्त विभाग का आकलन है कि नई क्षमता आधारित टैक्स व्यवस्था के चलते पान मसाला और तंबाकू से होने वाला कर संग्रह और घट सकता है, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, जहां इस उद्योग की रीढ़ क्षेत्रीय ब्रांड्स हैं।

विज्ञापन


वित्त विभाग के अनुसार पान मसाला और तंबाकू से मिलने वाला राजस्व पहले ही करीब 70 प्रतिशत तक गिर चुका है। जहां यह कर संग्रह पहले लगभग 1000 करोड़ रुपये था, वहीं अब घटकर करीब 300 करोड़ रुपये रह गया है, जबकि खपत में किसी तरह की कमी दर्ज नहीं की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्रीय वित्त मंत्री से नई क्षमता आधारित कर व्यवस्था पर पुनर्विचार का अनुरोध किया है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - चार-पांच दिन अच्छी धूप निकलने के बाद मौसम का यूटर्न, सड़कों पर घना कोहरा, गलन बढ़ी
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें - वजूद पर संकट... फिर भी तेवर बरकरार, मायावती ने कार्यकर्ताओं में भरा जोश, दोहराया संकल्प


नई व्यवस्था के तहत कर निर्धारण मशीन की उत्पादन क्षमता, पाउच के वजन और अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से जोड़ा गया है। उद्योग जानकारों के मुताबिक, यदि 500 पाउच प्रति मिनट की क्षमता वाली मशीन से 2.5 ग्राम तक का पाउच तैयार किया जाता है, तो उस पर मासिक उपकर लगभग 1.1 करोड़ रुपये तय किया गया है लेकिन जैसे ही पाउच का वजन या मशीन की गति बढ़ती है, कर का बोझ दोगुना होकर करीब 2.2 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। ऐसे में निर्माता न तो वजन बढ़ा पा रहे हैं और न ही कीमत।

नई कर व्यवस्था के चलते पान मसाला का आधार मूल्य 5 रुपये और पाउच का वजन 1 से 1.5 ग्राम के बीच सीमित रहने की संभावना जताई जा रही है। इससे बाजार में मात्रा आधारित प्रतिस्पर्धा लगभग खत्म होकर केवल गुणवत्ता की प्रतिस्पर्धा रह जाएगी। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे और क्षेत्रीय ब्रांड्स पर पड़ने की आशंका है, जो अब तक कम कीमत और अधिक वजन की रणनीति के सहारे बाजार में टिके हुए थे।

क्षेत्रीय इकाइयों पर अस्तित्व का संकट

वित्त विभाग को आशंका है कि यदि क्षेत्रीय ब्रांड्स की बिक्री और मांग में गिरावट आती है, तो इसका सीधा असर राज्य के कर राजस्व पर पड़ेगा। उत्तर प्रदेश में पान मसाला और तंबाकू उद्योग कर संग्रह का एक बड़ा स्रोत है, जिसमें क्षेत्रीय कंपनियों की भूमिका अहम मानी जाती है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने केंद्र से आग्रह किया है 2000 197108 कि इस क्षेत्र में फिलहाल पुरानी कर व्यवस्था को ही जारी रखा जाए। उद्योग जगत का भी मानना है कि नई प्रणाली से न केवल क्षेत्रीय इकाइयों का अस्तित्व संकट में पड़ेगा, बल्कि समग्र रूप से कर संग्रह में भी कमी आ सकती है। अब निगाहें केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी हैं कि 1 फरवरी से लागू होने जा रही इस कर व्यवस्था पर वह क्या रुख अपनाती है, क्योंकि यह निर्णय केवल उद्योग के भविष्य ही नहीं, बल्कि राज्य के राजस्व संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed