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UP News : प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने कहा- निकाय चुनाव में परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देगी भाजपा
Sat, 03 Sep 2022 12:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 03 Sep 2022 12:31 AM IST
सार
UP News : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि निकाय चुनाव में पार्टी परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देगी। हालांकि उन्होंने संकेत दिया है कि किसी सीट पर अत्यंत आवश्यकता हुई तो पार्टी नरम रुख भी अपना सकती है।
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि आगामी नगरीय निकाय चुनाव में पार्टी सांसद, विधायक और प्रदेश सरकार के मंत्रियों के परिवारजन को टिकट नहीं देगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के निगम, आयोग और बोर्डों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों को भी जल्द भरा जाएगा।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि निकाय चुनाव में पार्टी परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देगी। हालांकि उन्होंने संकेत दिया है कि किसी सीट पर अत्यंत आवश्यकता हुई तो पार्टी नरम रुख भी अपना सकती है। उन्होंने कहा कि निगम, आयोग और बोर्डों में सदस्य की नियुक्ति का विषय संज्ञान में है। पार्टी ने इसका होमवर्क भी किया है। इस संबंध में सामूहिक निर्णय लेकर मनोनयन की सूची सरकार को भेजी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष पंचायतीराज चुनाव से पहले भी पार्टी ने ऐसा ही निर्णय किया था। लेकिन, जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य के चुनावों में पार्टी की करारी हार हुई थी। वहीं मंत्रियों, विधायकों और सांसदों के परिवारजन निर्दलीय चुनाव लड़ गए थे। उसके बाद ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में पार्टी को अपना निर्णय बदलना पड़ा था।
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि निकाय चुनाव में पार्टी परिवारवाद को बढ़ावा नहीं देगी। हालांकि उन्होंने संकेत दिया है कि किसी सीट पर अत्यंत आवश्यकता हुई तो पार्टी नरम रुख भी अपना सकती है। उन्होंने कहा कि निगम, आयोग और बोर्डों में सदस्य की नियुक्ति का विषय संज्ञान में है। पार्टी ने इसका होमवर्क भी किया है। इस संबंध में सामूहिक निर्णय लेकर मनोनयन की सूची सरकार को भेजी जाएगी।
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उल्लेखनीय है कि गत वर्ष पंचायतीराज चुनाव से पहले भी पार्टी ने ऐसा ही निर्णय किया था। लेकिन, जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य के चुनावों में पार्टी की करारी हार हुई थी। वहीं मंत्रियों, विधायकों और सांसदों के परिवारजन निर्दलीय चुनाव लड़ गए थे। उसके बाद ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में पार्टी को अपना निर्णय बदलना पड़ा था।
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