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Lucknow News : सुभासपा और निषाद पार्टी की हिस्सेदारी पर टिकी अपना दल की निगाह
Thu, 13 Jul 2023 01:46 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 13 Jul 2023 01:46 AM IST
सार
अपना दल (एस) भी हिस्सेदारी तय करने को लेकर सक्रिय हो गया है। हालांकि उसकी निगाहें सुभासपा और निषाद पार्टी को मिलने वाली हिस्सेदारी पर टिकी है। ताकि वह उसको ही आधार बनाकर अपने लिए सीट छोड़ने का प्रस्ताव भाजपा हाईकमान के सामने रख सके ।
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अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
लोकसभा चुनाव में हिस्सेदारी को लेकर प्रदेश से जुड़े एनडीए के घटक दलों ने भी कवायद शुरू कर दी है । सुभासपा का जहां एनडीए में शामिल होना पक्का माना जा रहा है, वहीं निषाद पार्टी भी अपने कोटे की सीट तय करने को लेकर भाजपा पर दबाव बनाए हुए है। इसे देखते हुए अपना दल (एस) भी हिस्सेदारी तय करने को लेकर सक्रिय हो गया है। हालांकि उसकी निगाहें सुभासपा और निषाद पार्टी को मिलने वाली हिस्सेदारी पर टिकी है। ताकि वह उसको ही आधार बनाकर अपने लिए सीट छोड़ने का प्रस्ताव भाजपा हाईकमान के सामने रख सके ।
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दरअसल प्रदेश में भाजपा के सहयोगी के तौर पर सरकार में शामिल निषाद पार्टी के सिंबल पर जीते कुल छह विधायक हैं। वही, एनडीए में दुबारा शामिल होने को तैयार सुभासपा के छह विधायक हैं । जबकि अपना दल (एस) 2014 के लोकसभा चुनाव से ही एनडीए के साथ है और मौजूदा समय में इसके दो सांसद और 13 विधायक हैं । इसलिए अपना दल खुद को सबसे बड़ा सहयोगी दल मानता है। इस लिहाज से पार्टी का मानना है कि लोकसभा चुनाव में अपना दल (एस) को निषाद पार्टी और सुभासपा से अधिक सीटें मिलने चाहिए । हालांकि अपना दल ने पत्ता नहीं खोला है ।
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बता दें कि 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में अपना दल (एस) एनडीए का हिस्सा बना था । उस समय भाजपा ने इनके लिए मिर्जापुर और प्रतापगढ़ सीट छोड़ी थी। मिर्जापुर से खुद पार्टी अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल चुनाव लड़ी थीं और जीतने पर इन्हें केन्द्र में राज्यमंत्री बनाया गया था । उस समय अपना दल के पास सिर्फ एक विधायक था । इसके बाद प्रदेश में 2017 हुए हर विधानसभा चुनावों में अपना दल (एस) के विधायकों की संख्या बढ़ती ही गई है।
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2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने अपना दल (एस) के लिए 11 सीटें छोड़ी थी, पर इनके 9 उम्मीदवार जीते थे । जबकि 2022 के विधान सभा के चुनाव में अपना दल (एस) के विधयकों की संख्या बढ़कर 12 हो गई थी और हाल में ही हुए उपचुनाव में रामपुर की स्वार सीट जीतने के बाद इनके विधायकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। ऐसे में अपना दल (एस) चाहता है कि 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में 'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' के सिद्धांत का पालन करते हुए लोकसभा में सीट मिले । यानि अपना दल निषाद पार्टी और सुभासपा से अधिक सीटें चाहता है।
चार सीट पर दावेदारी पेश कर सकता है अपना दल
सूत्रों की माने तो अपना दल (एस) 2024 के लोस चुनाव में चार सीटों पर चुनाव लड़ना चाहता है। पिछले चुनाव में पार्टी को मिर्जापुर और सोनभद्र सीट मिली थी। लेकिन इस बार पार्टी मिर्जापुर के साथ ही प्रतापगढ़ व बस्ती सीट पर दावेदारी करने का मन बनाया है। वहीं, सोनभद्र के स्थान पर बुंदेलखंड की एक सीट पर लेना चाहते हैं। हालांकि पार्टी ने अभी तक इस संबंध में पत्ता नहीं खोला गया है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व यह देख रहा है कि 18 जुलाई को दिल्ली में होने एनडीए की बैठक में अन्य सहयोगी दलों की हिस्सेदारी किस फार्मूले पर तय होती है ।