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UP: धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत झूठे मामलों पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता, पूछा- क्या कार्रवाई की गई

Fri, 17 Apr 2026 09:51 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Fri, 17 Apr 2026 09:51 AM IST
सार

खंडपीठ ने कहा कि कई मामलों में तीसरे पक्ष द्वारा बिना ठोस आधार के एफआईआर दर्ज कराई जा रही हैं, जो बाद में निराधार साबित होती हैं। इससे जांच एजेंसियों का समय और संसाधन व्यर्थ हो रहा है। अदालत ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है।
 

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The High Court expressed concern over false cases filed under the anti-conversion law.
- फोटो : ANI

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश अवैध धर्मांतरण निषेध अधिनियम, 2021 के तहत झूठे मामलों की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने इस मुद्दे पर कार्रवाई की जानकारी देने के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है।

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न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने कहा कि कई मामलों में तीसरे पक्ष द्वारा बिना ठोस आधार के एफआईआर दर्ज कराई जा रही हैं, जो बाद में निराधार साबित होती हैं। इससे जांच एजेंसियों का समय और संसाधन व्यर्थ हो रहा है। अदालत ने निर्देश दिया कि सरकार बताए कि ऐसी झूठी एफआईआर के खिलाफ क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
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यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें बहराइच में तीन मुस्लिम पुरुषों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। कथित पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से संबंध में है। अदालत ने यह भी पाया कि जांच अजीब मोड़ ले चुकी थी और प्रथम दृष्टया जांच अधिकारी पर बाहरी प्रभाव की आशंका जताई।

कोर्ट ने शिकायतकर्ता को तलब कर पूछा कि झूठी एफआईआर दर्ज कराने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। साथ ही, आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए पीड़िता और संबंधित पक्षों को सुरक्षा देने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 19 मई की होगी।

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