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आंख का ऑपरेशन करवाना है तो जरूर पढ़े ये खबर

Mon, 08 Dec 2014 10:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 08 Dec 2014 10:50 AM IST
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shortage of lens in goverment hospitals of lucknow.

राजधानी के सरकारी अस्पतालों में ठंड के मौसम में आंख का ऑपरेशन कराने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसके बावजूद अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत अस्पतालों में लेंस की आपूर्ति नहीं हो रही है।

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अस्पतालों में लेंस की आपूर्ति न होने के चलते अस्पताल प्रशासन रोगी कल्याण समिति के बजट से लेंस की खरीदारी की जा रही है। अस्पतालों में लेंस की आपूर्ति न होने के चलते मरीजों को ऑपरेशन के लिए खुद से लेंस खरीदने की नौबत आ गई है।
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सिविल, बलरामपुर और लोहिया अस्पताल में आंख का ऑपरेशन मुश्किल हो रहा है। अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत अस्पतालों में नॉन फोल्डेबल लेंस की आपूर्ति की जाती है।
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अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले साल करीब दस हजार लेंस की आपूर्ति हुई थी। इसके बाद से लेंस आपूर्ति की व्यवस्था डगमगा गई। अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों ने पत्र लिखकर लेंस आपूर्ति की मांग की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अब आलम यह है कि अस्पताल में नेत्र रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है और हालात ऐसे ही रहे तो ऑपरेशन मुश्किल हो जाएगा।

लेंस, चश्मा और दवाएं खरीदनी पड़ेगी मरीजों को

shortage of lens in goverment hospitals of lucknow.

सरकारी अस्पताल के एक नेत्र रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि ऑपरेशन के लिए अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत नॉन फोल्डेबल लेंस की आपूर्ति होती है जिसकी कीमत करीब सौ रुपये होती है। अस्पतालों में लेंस की आपूर्ति न होने के चलते कई बार मरीज खुद लेंस खरीदकर लाता है।

वहीं बलरामपुर अस्पताल के निदेशक बताते हैं कि सीएमओ को नॉन फोल्डेबल लेंस के लिए लिखा गया है। मौजूदा समय में कुछ लेंस रोगी कल्याण समिति से मंगाए गए थे। फिलहाल ऑपरेशन चल रहा है और कहीं कोई दिक्कत नहीं है। यही हाल सिविल अस्पताल का है।

एक अधिकारी की मानें तो अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत नेत्र रोगियों को आंख में डालने के लिए दवा और चश्मा मिलता था। एनआरएचएम घोटाले के बाद से पूरी व्यवस्था पटरी से उतर गई। विशेषज्ञों का मानना है कि घोटाले की वजह से इलाज की व्यवस्था बिगड़ जाए ये कहां तक सही है।

नेत्र रोग विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन के बाद चश्मा और दवा के लिए मरीजों को कम से कम दो सौ से अधिक रुपये खर्च करना पड़ता है। कई बार अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत होने वाली बैठक में कई बार मामले की जानकारी दी गई लेकिन कुछ नहीं हुआ।

नहीं हुआ है रेट कांट्रैक्ट

shortage of lens in goverment hospitals of lucknow.

अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत आंख का ऑपरेशन अधिकारियों की लापरवाही से मुश्किम में पड़ सकता है। ठंड के मौसम में ऑपरेशन वाले रोगी अधिक होते हैं। इसके बावजूद अभी तक सामान की खरीदारी के लिए अभी तक रेट कांटैक्ट ही नहीं है।

एक अधिकारी की मानें तोआरसी न होने की वजह से लेंस की आपूर्ति नहीं हो रही है। आरसी होने के बाद पूरी व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी। वहीं सूत्रों का कहना है कि अभी तक आरसी नहीं हुई है इसका मतलब है कि लेंस की आपूर्ति शुरू होने में कम से कम एक महीने का समय लगेगा। अगर हाल यही रहा तो मरीजों की मुसिबत बढ़नी तय है।

अंधता निवारण कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. सईद अहमद ने बताया कि अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत लेंस की आपूर्ति सभी अस्पतालों में है। नया रेट कांट्रैक्ट न होने से थोड़ी दिक्कत आ रही है। रेट कांट्रैक्ट होने के बाद सभी अस्पतालों में लेंस की आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। किसी अस्पताल में लेंस के अभाव में ऑपरेशन बंद नहीं होंगे और मरीजों को परेशान न होना पड़ेगा।

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