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Lucknow News: गोरखपुर से लखनऊ तक दौड़, डेढ़ घंटे के इंतजार बाद मिला वेंटिलेटर, मौत

Thu, 02 Apr 2026 02:47 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 02 Apr 2026 02:47 AM IST
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Running from Gorakhpur to Lucknow, after waiting for one and a half hours, got ventilator, died
बलरामपुर अस्पताल में वेंटिलेटर के इंतजार में एंबुलेंस में पड़ा मरीज।  - फोटो : संवाद
लखनऊ। स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच राजधानी में एक बार फिर मानवता शर्मसार हुई है। गोरखपुर से आए एक बुजुर्ग मरीज वेंटिलेटर के लिए एक से दूसरे संस्थान भटकते रहे, लेकिन उन्हें समय पर इलाज नहीं मिला। एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस में करीब डेढ़ घंटे तक तड़पने के बाद देवरिया निवासी पारसनाथ पांडेय (65) की बलरामपुर अस्पताल में मौत हो गई।
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हैरानी की बात यह रही कि जिस वक्त मरीज एंबुलेंस में जिंदगी की जंग लड़ रहा था, उस समय स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव, डीजी हेल्थ और सीएमओ समेत तमाम आला अफसर अस्पताल में ही मौजूद थे। कुछ ही देर पहले डिप्टी सीएम वहां से निकले थे, लेकिन किसी भी अधिकारी की नजर तड़पते मरीज पर नहीं पड़ी।
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केजीएमयू से बलरामपुर तक का संघर्ष

सांस और लिवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे पारसनाथ को परिजन बुधवार सुबह केजीएमयू लेकर पहुंचे थे। वहां एक घंटे तक एंबुलेंस में रहने के बाद डॉक्टरों ने वेंटिलेटर खाली न होने का हवाला देकर बलरामपुर अस्पताल रेफर कर दिया। दोपहर करीब 12:30 बजे परिजन मरीज को लेकर बलरामपुर अस्पताल पहुंचे। बेटे चंद्रप्रकाश का आरोप है कि इमरजेंसी में परचा और फाइल बनाने की प्रक्रिया में ही आधा घंटा बर्बाद हो गया। जब तक मरीज को आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उन्होंने दम तोड़ दिया।
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कोशिश रहती है कि सभी मरीजों को इलाज मिल सके। मरीज के आने पर उसकी स्थिति का आकलन करने में थोड़ा समय जरूर लग जाता है। वेंटिलेटर खाली न होने पर परिजनों को इसकी जानकारी दे दी जाती है। इसके बाद भी कुछ लोग वेंटिलेटर मिलने के इंतजार में प्रयास करते रहते हैं, जिसके कारण मरीज की जान जोखिम में पड़ जाती है। इस मरीज के मामले में भी ऐसा ही हुआ होगा।

- डॉ. प्रेमराज सिंह,
सीएमएस, ट्रॉमा सेंटर, केजीएमयू
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मरीज को आईसीयू में शिफ्ट करा दिया गया था। काफी देर तक इंतजार करने की जानकारी नहीं है। परिजनों ने कोई भी शिकायत दर्ज नहीं कराई है।

- डॉ. हिमांशु, सीएमएस, बलरामपुर अस्पताल


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वेंटिलेटरों की उपलब्धता पर हाईकोर्ट भी जता चुका है चिंता

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राजधानी के सरकारी मेडिकल संस्थानों और अस्पतालों में वेंटिलेटर की उपलब्धता ने चिंता जताई है। कोर्ट ने राज्य सरकार से वेंटिलेटर की संख्या और उनकी वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट और शपथ पत्र मांगा है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए लखनऊ के सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों से वेंटिलेटर का पूरा आंकड़ा मांगा है। कोर्ट ने पिछली सुनवाइयों में स्पष्ट किया कि वह यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उपलब्ध वेंटिलेटर मरीजों की जान बचाने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं और कितने वेंटिलेटर वर्तमान में कार्यशील हैं।


इस मामले में न्यायालय ने चिकित्सा संस्थानों को यह आदेश भी दिया है कि वे शपथ पत्र के माध्यम से बताएं कि उनके पास कुल कितने वेंटिलेटर हैं और वास्तव में कितने की आवश्यकता है। अक्टूबर 2025 में हुई सुनवाई के दौरान भी कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी और मामले की गंभीरता को देखते हुए नियमित निगरानी की बात कही थी।
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