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1000 करोड़ दांव पर ः रेड जोन में फंसा आम का कारोबार

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sat, 09 May 2020 03:06 AM IST
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mango business effected due to corona
प्रमोद कुमार, लखनऊ। कोरोना महामारी के चलते फलपट्टी क्षेत्र मलिहाबाद में सब्जी और फूल की फसल बर्बाद होने के बाद अब यहां के व्यवसाय की जान यानी आम की फसल पर भी संकट मंडरा रहा है। बागबानों का मानना है कि संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। जून में संक्रमण चरम पर होने की आशंका है। अगर लॉकडाउन और बढ़ा तो आम का कारोबार तबाह हो जाएगा और करीब 1000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। इस आर्थिक संकट से उबरना बागबानों के लिए बड़ी चुनौती होगी। अगर लॉकडाउन खुल जाता है और सही बाजार मिल भी जाए तो नुकसान की थोड़ी-बहुत ही भरपाई हो पाएगी।
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मैंगो ग्रोवर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंशराम अली बताते हैं कि मलिहाबाद फलपट्टी में 30 हजार हेक्टेयर में आम की फसल होती है। हर वर्ष औसतन 6 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है। मौसम की बेरुखी से फसल औसत से भी कमजोर है। इसके बावजूद पैदावार इतनी है कि सही बाजार मिल जाए तो क्षेत्र को 1000 से 1200 करोड़ की आय होगी। कारोबार चौपट हुआ तो बागबानों के सामने भुखमरी की स्थिति आ जाएगी। मौजूदा हालात और बागबानों की मदद के लिए केंद्रीय मंत्री को एक पत्र भी लिखा है। सरकार से राहत मिली तो ठीक, वरना कारोबार तो दांव पर है।
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देश की जिन मंडियों में कारोबार वे हैं रेड जोन में दुनिया भर में अलग मिठास के लिए मशहूर मलिहाबादी दशहरी का देश की जिन प्रमुख मंडियों से सबसे ज्यादा कारोबार होता है, वे सब रेड जोन में हैं। वहां संक्रमण की रफ्तार भी काफी तेज है। क्षेत्र के बड़े बागबान व दिल्ली मंडी से जुड़े मीनू वर्मा बताते हैं कि पूरे फलपट्टी क्षेत्र में 200 करोड़ से भी अधिक का कारोबार दिल्ली मंडी से होता है। आम के आढ़ती हाफिज हलीम के अनुसार महाराष्ट्र की मंडी में भी 100 करोड़ से अधिक का कारोबार होता है। दोनों रेड जोन में हैं। ऐसी स्थिति में आम पहुंचेगा, पहुंचेगा तो बिकेगा या नहीं, कुछ कहा नहीं जा सकता। वहां के आढ़ती भी कारोबार को लेकर आश्वस्त नहीं।  
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मलिहाबाद में आम 400 करोड़ का आम यूपी में ही खप जाता है। प्रमुख रूप से कानपुर, झांसी, आगरा, बरेली व मलिहाबाद की स्थानीय मंडी में। इन मंडियों में बागवान अपना आम खुद पहुंचाते हैं अन्य प्रदेशों में कारोबार दिल्ली 200 करोड़ महाराष्ट्र 100 करोड़ पंजाब 100 (प्रमुख मंडी अमृतसर, जालंधर) जम्मू 30 मध्यप्रदेश 20 बंगाल 50 करोड़ (प्रमुख मंडी कोलकाता) बिहार, ओडिशा, उत्तराखंड सहित अन्य प्रदेशों में 100 करोड़ (कारोबार एजेंटों के जरिये होता है।)
निर्यात की उम्मीद कम मौसम की मार के कारण इस बार 30 या 40 फीसदी ही आम की फसल है। ओले गिरने से बहुत आम बर्बाद हुआ है। तैयार बाग भी नहीं बिक रही। इस बार निर्यात की उम्मीद नजर नहीं आ रही। दूसरे राज्य तो छोड़िए पास की कानपुर मंडी तक में कोरोना संक्रमण का असर है।’ - एससी शुक्ला, राज्य सरकार से सर्वश्रेष्ठ आम उत्पादक का पुरस्कार प्राप्त
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