यूपी: माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक की अर्हता में संशोधन, 50 फीसदी अंक के साथ बीएड जरूरी
प्रदेश में माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक की अर्हता में संशोधन किया गया है। अब दोनों पदों के लिए स्नातकोत्तर में 50 प्रतिशत अंक जरूरी होंगे। प्रधानाचार्य के लिए बीएड, जबकि प्रधानाध्यापक के लिए बीएड और बीपीएड अनिवार्य किया गया है। चार वर्ष का शिक्षण अनुभव और 30 वर्ष की न्यूनतम आयु पूर्ववत रहेगी।
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प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से प्रधानाचार्य (इंटर स्तर) व प्रधानाध्यापक (हाईस्कूल स्तर) की अर्हता में संशोधन किया गया है। इसमें जहां पीजी स्तर पर राहत देते हुए 50 फीसदी अंक तय किए गए हैं। वहीं बीएड को शामिल किया गया है। जबकि अनुभव का नियम पूर्व की भांति रहेगा।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव संदीप परमार की ओर से जारी आदेश के अनुसार उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 के अध्याय 2 के विनियम-1 के परिशिष्ट क में संस्था प्रधान की अर्हता में संशोधन किया गया है। इसके तहत प्रधानाचार्य के लिए पीजी में 50 फीसदी अंक होने चाहिए।
30 साल से कम आयु न होना, चाहिए
एनसीटीई द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम में बीएड होना चाहिए। साथ ही पूर्व की भांति राज्य सरकार की उच्चतर कक्षाओं (नौ से 12 में) प्रवक्ता व सहायक अध्यापक के पद पर कम से कम चार साल का शिक्षण अनुभव, हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक पद पर कम से कम चार साल का अनुभव, 30 साल से कम आयु न होना, चाहिए।
इसी क्रम में प्रधानाध्यापक के लिए पीजी 50 फीसदी अंकों के साथ, एनसीटीई द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम में बीएड व बीपीएड होना होगा। साथ ही केंद्र-राज्य सरकार की मान्यता प्राप्त संस्थाओं में कक्षा नौ से 12 में प्रवक्ता, सहायक अध्यापक के पद पर कम से कम चार साल का शिक्षक अनुभव, जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक पद पर कम से कम चार साल का अनुभव, 30 वर्ष से कम आयु नहीं होनी चाहिए।
बता दें कि अभी तक दोनों पद के लिए लगभग एक जैसी अर्हता थी। वहीं अनुभव के आधार पर पीजी में अंकों में छूट का भी प्रावधान था। इसे बदलते हुए जहां दोनों पदों के लिए अर्हता तय की गई, वहीं अनुभव के आधार पर कोई छूट नहीं दी गई है। डिप्लोमा अर्हता समाप्त कर दी गई है।