{"_id":"64a5b067f9b7e0bdd80036da","slug":"mandate-issued-after-up-cabinet-approval-township-can-be-built-on-agricultural-land-if-the-area-is-more-than-2023-07-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी कैबिनेट मंजूरी के बाद शासनादेश जारी : 50 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल होने पर खेती की जमीन पर बन सकेगी टाउनशिप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी कैबिनेट मंजूरी के बाद शासनादेश जारी : 50 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल होने पर खेती की जमीन पर बन सकेगी टाउनशिप
Thu, 06 Jul 2023 05:36 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 06 Jul 2023 05:36 AM IST
सार
इस नीति के मुताबिक 50 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल होने पर खेती की जमीन पर भी टाउनशिप लाने की अनुमति दी जा सकेगी। इसके अलावा नीति के कई तरह के प्रावधान किए गए हैं।
विज्ञापन
Yogi Adityanath
- फोटो : facebook
विस्तार
छोटे शहरों के सुनियोजित विकास के उद्देश्य से सरकार द्वारा तैयार उप्र टाउनशिप नीति, 2023 को लागू कर दिया है । अपर मुख्य सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण ने बुधवार को इस नीति को लागू करने के संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है । इस नीति के मुताबिक 50 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल होने पर खेती की जमीन पर भी टाउनशिप लाने की अनुमति दी जा सकेगी। इसके अलावा नीति के कई तरह के प्रावधान किए गए हैं।
विज्ञापन
शासन की ओर से जारी शासनादेश के मुताबिक नीति के तहत शुरू होने वाली टाउनशिप में मानमाने तरीके से भू-उपयोग नहीं बदला जा सकेगा । अलबत्ता टाउनशिप का क्षेत्रफल 50 एकड़ से कम होने पर मास्टर प्लान में केवल आवासीय उपयोग की अनुमति दी जाएगी। इससे अधिक क्षेत्रफल होने पर खेती की जमीन पर टाउनशिप लाने की अनुमति दी जाएगी ।
विज्ञापन
नई नीति में दो लाख से कम आबादी वाले शहरों में 12.5 एकड़ व दो लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में 25 एकड़ में टाउनशिप लाने की अनुमति दी गई है। अर्बन मास ट्रांजिट कॉरीडोर्स के साथ और ऐसे क्षेत्रों जहां विकास के नए ग्रोथ सेंटर्स है उसे प्रोत्साहित किया जाएगा। भू-उपयोग भी शर्तों के साथ बदलने की छूट दी जाएगी। पांच लाख से दस लाख आबादी वाले शहरों में 25 फीसदी, पांच लाख से आबादी कम होने पर 50 प्रतिशत की छूट भू-उपयोग परिवर्तन पर दिया जाएगा।
विज्ञापन
टाउनशिप में आवासीय, मिश्रित, व्यवसायिक, औद्योगिक संस्थान, सार्वजनिक और अर्द्ध सार्वजनिक सुविधाएं देनी होंगी। मनोरंजन, पार्क, खुले क्षेत्र, क्रीड़ा स्थल व जलाशलय और यातायात एवं परिवहन व पार्किंग स्थलों के मानकों का पालन करते हुए आरक्षित करना होगा।