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लखनऊ : यूपीडा के कैंसल चेक की क्लोनिंग कर रकम उड़ाने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड गिरफ्तार

Thu, 09 Sep 2021 10:22 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 09 Sep 2021 10:22 AM IST
सार

इस गिरोह के चार गुर्गों को एसटीएफ पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। गिरोह ने यूपीडा के अलावा शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय व यूपी आयुष सोसायटी के खातों में भी सेंध लगाई थी। पुलिस ने इस पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। वहीं अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।

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Lucknow: The mastermind of the gang who cloned the canceled check of UPEDA and looted the money arrested
ठगी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के कैंसल चेक का क्लोन बनाकर खाते से 40 लाख रुपये उड़ाने वाले गिरोह का मास्टर माइंड ओमप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ अजय गिरफ्तार कर लिया गया। विभूतिखंड पुलिस ने शातिर को मुंबई के मैक्स थियेटर के सामने मीरा रोड थाणे से दबोचा।

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इस गिरोह के चार गुर्गों को एसटीएफ पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। गिरोह ने यूपीडा के अलावा शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय व यूपी आयुष सोसायटी के खातों में भी सेंध लगाई थी। पुलिस ने इस पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। वहीं अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
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प्रभारी निरीक्षक विभूतिखंड चंद्रशेखर सिंह के मुताबिक, गिरोह का मास्टर माइंड ओमप्रकाश ही है। मुंबई के पालघर निवासी ओमप्रकाश चेक का क्लोन बनाकर कई सरकारी व निजी संस्थानों के खातों से लाखों रुपये पार कर चुका है। विभूतिखंड स्थित बैंक ऑफ  बड़ौदा के चीफ  मैनेजर संजय कुमार ने मुकदमा दर्ज कराया था कि शाखा में यूपीडा के  खाते से चार चेक के जरिये 39.46 लाख रुपये निकाल लिए गए थे। इसके बाद ही शादाब अनवर के नाम से सेंट्रल बैंक से 9.85 लाख रुपये निकालने की कोशिश की गई।
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बैंक ने जब खाताधारक से संपर्क किया तो पता चला कि उन्होंने ऐसा चेक ही नहीं जारी किया। इसी तरह अन्य खातों से भी रुपये निकालने की कोशिश की गई थी। मुकदमा दर्ज होने के बाद एसटीएफ  ने पिछले साल 21 अक्तूबर को अरविंद तिवारी, मनीष मौर्या व शादाब अनवर शेख और इसी साल पांच अगस्त को राशिद को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में आरोपियों ने कुबूला था कि जालसाजी में सबसे अहम भूमिका ओम प्रकाश की थी।


राशिद से काला धन ट्रांसफर कराता था
प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक, पूछताछ में ओमप्रकाश ने कुबूला कि चार साल पहले राशिद से मुलाकात हुई थी। राशिद वहां खान इंटरप्राइजेज लि. नाम से मनी ट्रांसफर का काम करता था। मूलरूप से जौनपुर निवासी ओम प्रकाश ने काला धन ट्रांसफर करने के लिए कहा था। इसके बाद से ही ये दोनों सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों के कैंसल चेक का क्लोन बनाकर ठगी करने लगे थे।

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