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किसकी मायूसी बढ़ाएगी मतदान प्रतिशत में कमी, पहले तीन चरणों की तुलना में चौथे में घटा मतदान
Tue, 30 Apr 2019 12:34 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 30 Apr 2019 12:34 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
मतदान का बढ़ना या घटने के पीछे कोई न कोई सियासी संकेत छिपा होता है। सोमवार को उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 13 सीटों पर पिछले तीन चरणों की तुलना में मतदान में गिरावट के संकेतों का भी आकलन शुरू हो गया है। सभी सियासी दल इसके मायने तलाश रहे हैं। जिन 13 सीटों पर सोमवार को वोट पड़े हैं, उनमें वर्ष 2014 में भाजपा ने 12 और सपा ने एक सीट (कन्नौज) जीती थी।
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यदि लोकसभा चुनाव के पिछले तीन चरणों से तुलना करें तो सोमवार को चौथे चरण में लगभग 4% कम मतदान हुआ है। पहले तीन चरणों में 26 सीटों पर कुल 62.50% मतदान हुआ था। यानी पश्चिमी यूपी में पहले तीन चरणों की तुलना में चौथे चरण में सोमवार को मतदाताओं के उत्साह में कमी दिखाई पड़ रही है। सभी राजनीतिक दल मतदान के रुझान को अपने अनुकूल बता रहे हैं लेकिन वे इससे होने वाले नुकसान या फायदे की समीक्षा में जुट गए हैं।
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2014 की तुलना में शाहजहांपुर (सुरक्षित) लोकसभा सीट में गिरावट आई है। 2014 में 57.03% की तुलना में इस बार 56.35% वोट पड़े हैं। शाहजहांपुर में भाजपा ने अपनी मौजूदा सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णाराज का टिकट काटकर अरुण कुमार सागर को उम्मीदवार बनाया था। बसपा से अमर चन्द्र जौहर और कांग्रेस से ब्रह्म सहाय सागर मैदान में थे। झांसी में भी मतदान में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट है। हालांकि उन्नाव में 2 फीसदी मतदान बढ़ा है।
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गर्मी बढ़ना भी कम मतदान की वजह
चुनाव के प्रति उत्साह में कमी की वजह राजनीतिक भी होती है और मौसम भी असर डालता है। पहले तीन चरणों की तुलना में पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। भीषण गर्मी भी वोटरों से बूथों कर अपेक्षाकृत कम तादाद में पहुंचने की एक वजह है।