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विधान परिषद चुनाव : भाजपा को पहली बार मिला बहुमत, पांच साल में 7 से 66 पहुंची, सपा के 17, बसपा के 4, कांग्रेस के एक
Tue, 12 Apr 2022 09:33 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 12 Apr 2022 09:33 PM IST
सार
परिषद की स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र की 36 सीटों के लिए हुए चुनाव में भाजपा ने 33 सीटों पर जीत दर्ज की जबकि तीन सीटों पर निर्दलीयों ने बाजी मारी। सपा का सूपड़ा साफ हो गया। पांच वर्ष में उच्च सदन में भाजपा की सदस्य संख्या 7 से 67 हो गई है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के इतिहास में मंगलवार को भाजपा ने 66 सीटों के साथ पहली बार पूर्ण बहुमत हासिल किया। वहीं समाजवादी पार्टी महज 17 सीटों पर सिमट कर रह गई। परिषद की स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र की 36 सीटों के लिए हुए चुनाव में भाजपा ने 33 सीटों पर जीत दर्ज की जबकि तीन सीटों पर निर्दलीयों ने बाजी मारी। सपा का सूपड़ा साफ हो गया। पांच वर्ष में उच्च सदन में भाजपा की सदस्य संख्या 7 से 67 हो गई है।
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2017 में प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी उस समय परिषद में भाजपा की सदस्य संख्या मात्र सात थी जबकि सपा, बसपा, कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के 93 सदस्य थे। स्थिति ऐसी भी थी कि उस दौरान मुख्यमंत्री, तत्कालीन दोनों उप मुख्यमंत्री और सरकार के तीन मंत्री किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। छह महीने में उन्हें किसी एक सदन का सदस्य बनाने के लिए भाजपा को सपा और बसपा के छह सदस्यों का परिषद से इस्तीफा कराकर उन्हें भाजपा में शामिल करना पड़ा था। योगी सरकार 1.0 के पूरे कार्यकाल में भाजपा परिषद में अल्पमत में रही। इसे योगी सरकार का कुशल राजनीतिक प्रबंधन ही कहा जाएगा कि अल्पमत में होने के बाद भी पांच वर्ष में एक भी ऐसा प्रस्ताव या विधेयक नहीं हुआ जो अल्पमत के कारण पास न हुआ हो।
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विधान परिषद में बहुमत हासिल करने के लिए भाजपा ने करीब एक साल पहले से ही चुनावी तैयारी शुरू कर दी थी। सपा के सात सदस्यों को तोड़कर भाजपा में शामिल कराया गया था। वहीं प्रत्याशी चयन में भी पार्टी ने कार्डर को मौका देकर एक-एक सीट पर मजबूत चुनाव प्रबंधन किया। नतीजन मंगलवार को आए परिणाम के बाद परिषद में भाजपा की सदस्य संख्या 33 से बढ़कर 66 हो गई है। विधानसभा के बाद विधान परिषद में भी भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने के बाद अब योगी सरकार को दोनों सदनों में विधेयक और प्रस्ताव दोनों पारित कराने में आसानी होगी।
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सौ सदस्यों वाली विधान परिषद में अब भाजपा के 66, सपा के 17, बसपा के चार, कांग्रेस के एक, अपना दल के एक, निषाद पार्टी के एक, जनसत्तादल लोकतांत्रिक के एक, शिक्षक दल के दो, निर्दल समूह के एक, निर्दलीय 3 परिषद सदस्य है। जबकि तीन पद रिक्त है।
जुलाई में 80 को पार कर जाएगा आंकड़ा
विधान परिषद मे मनोनीत कोटे की तीन सीटों का कार्यकाल 28 अप्रैल और तीन सीटों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। मनोनीत कोटे की सभी छह सीटों पर भाजपा के सदस्य मनोनीत किए जाएंगे। इनमें हालही में योगी सरकार में शामिल किए गए ऐसे मंत्रियों को मनोनीत किया जाएगा जो फिलहाल किसी सदन के सदस्य नहीं है। वहीं जुलाई में विधानसभा क्षेत्र की 14 सीटों का चुनाव होना है। विधानसभा में सदस्य संख्या की दृष्टि से 14 में से करीब 10 सीटों पर भाजपा को जीत मिल सकती है। ऐसे में जुलाई में परिषद में भाजपा के सदस्यों की संख्या 82 तक पहुंच जाएगी।
योगी के नेतृत्व में मिली सफलता
विधानसभा चुनाव में 36 साल बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की लगातार दूसरी बार सरकार बनने का रिकार्ड बना। वहीं अब योगी के नेतृत्व में भी विधान परिषद में भाजपा को पहली बार पूर्ण बहुमत प्राप्त करने का रिकार्ड बना है।