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Lucknow News: इंस्पेक्टर के भाई को डिजिटल अरेस्ट रख एक लाख वसूले
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प्रतीकात्मक।
लखनऊ। साइबर जालसाजों ने पुलिस अधिकारी बनकर कृष्णानगर के कृष्णापल्ली निवासी बीएसएफ में इंस्पेक्टर विजय के भाई विनय कुमार गुप्ता को चार घंटे डिजिटल अरेस्ट रखकर एक लाख रुपये वसूल लिए। ठगों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दोषी बताया। पीड़ित ने कृष्णानगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।
विनय के मुताबिक 25 अगस्त की सुबह नौ बजे उनके पास अनजान नंबर से व्हाट्सएप की ऑडियो कॉल आई। फोन करने वाले ने टेलीकॉम विभाग के कर्मचारी सुरेश कुमार के रूप में परिचय दिया। उसने कहा कि तुम्हारा सिम दो घंटे बाद बंद हो जाएगा। विनय के कारण पूछने पर बोला- तुम्हारी आईडी से दिल्ली में 20 मार्च को सिम खरीदा गया है। नंबर से कई आपराधिक गतिविधियां हुई हैं। दिल्ली के थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। वहां से सिम बंद करने का आदेश मिला है।
जालसाज ने पुलिस से एनओसी लेने की बात कहकर कॉल काट दी। कुछ देर बाद विनय के व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का अफसर सुनील कुमार बताते हुए आईडी कार्ड दिखाया। उसने विनय से कहा कि तुम्हारे खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के 60 मामले दर्ज हैं। मोबाइल भी सर्विलांस पर लगा है। यह सुनकर विनय घबरा गए। उन्हें परेशान देख शातिर ने पूछताछ और ऑनलाइन बयान दर्ज कराने के बहाने डिजिटल अरेस्ट कर लिया। आरोपी ने पूछताछ के बारे में किसी को न बताने की बात कही। बात न मानने पर गिरफ्तारी का डर दिखाया।
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जांच के बहाने ट्रांसफर करवा ली रकम
करीब चार घंटे तक प्रताड़ित करने के बाद जालसाज ने विनय से कहा, तुम्हारे खाते में जो रकम है उसे मेरे खाते में ट्रांसफर कर दो। इसकी आरबीआई जांच करेगी। पड़ताल पूरी होने पर दो दिन बाद तुम्हें रकम लौटा दी जाएगी। विनय ने ठग की बात मानते हुए उसके खाते में एक लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद जालसाज ने मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। दो दिन बाद विनय को रकम नहीं मिली तो उन्होंने भाई को जानकारी दी। तब उन्हें ठगी का पता चला। झिझक के कारण पीड़ित ने काफी दिनों तक थाने में शिकायत नहीं की। घरवालों के समझाने पर वह शुक्रवार को कृष्णानगर थाने पहुंचे। इंस्पेक्टर पीके सिंह के मुताबिक जिन नंबरों से कॉल की गई और जिस खाते में रकम ट्रांसफर की गई, उनका ब्योरा निकाला जा रहा है।
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विनय के मुताबिक 25 अगस्त की सुबह नौ बजे उनके पास अनजान नंबर से व्हाट्सएप की ऑडियो कॉल आई। फोन करने वाले ने टेलीकॉम विभाग के कर्मचारी सुरेश कुमार के रूप में परिचय दिया। उसने कहा कि तुम्हारा सिम दो घंटे बाद बंद हो जाएगा। विनय के कारण पूछने पर बोला- तुम्हारी आईडी से दिल्ली में 20 मार्च को सिम खरीदा गया है। नंबर से कई आपराधिक गतिविधियां हुई हैं। दिल्ली के थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। वहां से सिम बंद करने का आदेश मिला है।
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जालसाज ने पुलिस से एनओसी लेने की बात कहकर कॉल काट दी। कुछ देर बाद विनय के व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का अफसर सुनील कुमार बताते हुए आईडी कार्ड दिखाया। उसने विनय से कहा कि तुम्हारे खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के 60 मामले दर्ज हैं। मोबाइल भी सर्विलांस पर लगा है। यह सुनकर विनय घबरा गए। उन्हें परेशान देख शातिर ने पूछताछ और ऑनलाइन बयान दर्ज कराने के बहाने डिजिटल अरेस्ट कर लिया। आरोपी ने पूछताछ के बारे में किसी को न बताने की बात कही। बात न मानने पर गिरफ्तारी का डर दिखाया।
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जांच के बहाने ट्रांसफर करवा ली रकम
करीब चार घंटे तक प्रताड़ित करने के बाद जालसाज ने विनय से कहा, तुम्हारे खाते में जो रकम है उसे मेरे खाते में ट्रांसफर कर दो। इसकी आरबीआई जांच करेगी। पड़ताल पूरी होने पर दो दिन बाद तुम्हें रकम लौटा दी जाएगी। विनय ने ठग की बात मानते हुए उसके खाते में एक लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद जालसाज ने मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। दो दिन बाद विनय को रकम नहीं मिली तो उन्होंने भाई को जानकारी दी। तब उन्हें ठगी का पता चला। झिझक के कारण पीड़ित ने काफी दिनों तक थाने में शिकायत नहीं की। घरवालों के समझाने पर वह शुक्रवार को कृष्णानगर थाने पहुंचे। इंस्पेक्टर पीके सिंह के मुताबिक जिन नंबरों से कॉल की गई और जिस खाते में रकम ट्रांसफर की गई, उनका ब्योरा निकाला जा रहा है।