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Lucknow News: कमीशन के लिए महंगी दर पर खरीदे सामान, जांच के आदेश
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केजीएमयू।
लखनऊ। केजीएमयू में कमीशनखोरी के चक्कर में सरकारी धन के बंदरबांट का बड़ा मामला सामने आया है। संस्थान के अफसरों पर आरोप है कि उन्होंने जेम पोर्टल पर उपलब्ध सस्ती दरों को नजरअंदाज कर स्थानीय वेंडरों से महंगी दरों पर सामान की खरीद की। इस वित्तीय अनियमितता का खुलासा होने के बाद कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने जांच के आदेश दिए हैं।
कुलपति ने अप्रैल में वित्त अधिकारी को पत्र लिखकर खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका जताई है। पत्र में स्पष्ट किया है कि कई ऐसी फाइलें सामने आई हैं, जिनमें सामान की कीमत जेम पोर्टल की तुलना में काफी अधिक दिखाई गई है। कुलपति ने इन संदिग्ध फाइलों का उल्लेख करते हुए वित्त अधिकारी से जवाब मांगा है और खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि जिन वस्तुओं की दरें जेम पोर्टल पर कम थीं, उन्हें फाइलों में जानबूझकर महंगा दिखाया गया, ताकि लोकल वेंडरों को फायदा पहुंचाया जा सके। इसे सीधे तौर पर नियमों की अनदेखी और सरकारी बजट की बर्बादी माना जा रहा है। कुलपति ने निर्देश दिए हैं कि सभी संदिग्ध फाइलों की निगरानी बढ़ाई जाए। भविष्य में किसी भी खरीद से पहले जेम पोर्टल की दरों का अनिवार्य रूप से मिलान किया जाए और न्यूनतम दरों पर ही सामान खरीदा जाए।
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संस्थान में मची खलबली
केजीएमयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में जहां सालाना लगभग 1800 करोड़ रुपये का बजट खर्च होता है और 4000 बेड पर हजारों मरीजों का इलाज होता है, वहां इस तरह की धांधली ने प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। कुलपति की सख्ती और जांच शुरू होने से संबंधित विभागों और अधिकारियों में खलबली मच गई है।
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कुलपति ने अप्रैल में वित्त अधिकारी को पत्र लिखकर खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका जताई है। पत्र में स्पष्ट किया है कि कई ऐसी फाइलें सामने आई हैं, जिनमें सामान की कीमत जेम पोर्टल की तुलना में काफी अधिक दिखाई गई है। कुलपति ने इन संदिग्ध फाइलों का उल्लेख करते हुए वित्त अधिकारी से जवाब मांगा है और खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
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प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि जिन वस्तुओं की दरें जेम पोर्टल पर कम थीं, उन्हें फाइलों में जानबूझकर महंगा दिखाया गया, ताकि लोकल वेंडरों को फायदा पहुंचाया जा सके। इसे सीधे तौर पर नियमों की अनदेखी और सरकारी बजट की बर्बादी माना जा रहा है। कुलपति ने निर्देश दिए हैं कि सभी संदिग्ध फाइलों की निगरानी बढ़ाई जाए। भविष्य में किसी भी खरीद से पहले जेम पोर्टल की दरों का अनिवार्य रूप से मिलान किया जाए और न्यूनतम दरों पर ही सामान खरीदा जाए।
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संस्थान में मची खलबली
केजीएमयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में जहां सालाना लगभग 1800 करोड़ रुपये का बजट खर्च होता है और 4000 बेड पर हजारों मरीजों का इलाज होता है, वहां इस तरह की धांधली ने प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। कुलपति की सख्ती और जांच शुरू होने से संबंधित विभागों और अधिकारियों में खलबली मच गई है।