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यूपी का रण : केंद्र में कर्मचारी, दांव-पेंच जारी- सपा मुखिया ने पुरानी पेंशन की बहाली की घोषणा कर चला बड़ा सियासी दांव
Fri, 21 Jan 2022 11:50 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 21 Jan 2022 11:50 AM IST
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव।
- फोटो :
amar ujala
विस्तार
दूसरे दलों के चर्चित चेहरों को अपने पाले में लाकर सियासी बढ़त हासिल करने की मची होड़ के बीच सपा मुखिया अखिलेश यादव ने पुरानी पेंशन बहाल करने का वादा कर बड़ा सियासी दांव चला है। उन्होंने कर्मचारियों के आउटसोर्सिंग व्यवस्था के विरोध में सुर मिलाते हुए सरकार में आने पर इसके समाधान की भी बात कही है। सत्ता की लड़ाई में मुख्य प्रतिद्वंद्वी दल के इस वादे से कर्मचारियों का मुद्दा विधानसभा चुनाव के केंद्र में आ गया है। भाजपा इस मुद्दे पर अब तक कोई स्पष्ट राय नहीं तय कर पाई है। केंद्र सरकार अब तक पुरानी पेंशन बहाल करने से इनकार करती आई है।
राज्य के 16 लाख कर्मचारी लंबे समय से पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा 5 लाख से अधिक आउटसोर्सिंग कर्मी इस व्यवस्था में शोषण का हवाला देकर इसे समाप्त करने की मांग करते रहे हैं। खास बात यह है कि इन दोनों ही मुद्दों का समर्थन सरकारी नौकरी की लाइन में खड़े युवा भी पूरी ताकत से कर रहे हैं। केंद्र की सत्ता में कांग्रेस रही हो या भाजपा, विपक्ष में रहकर पुरानी पेंशन की वकालत और सत्ता में आकर उसकी बहाली से पल्ला झाड़ने से कर्मचारियों की नाराजगी बढ़ी ही है। अखिलेश यादव ने पेंशन बहाली का वादा और आउटसोर्स कर्मियों के हित को सुरक्षित बनाने की बात कर कुल 21 लाख कर्मचारियों व उनके परिवार को मिलाकर करीब एक करोड़ लोगों को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाला मास्टर स्ट्रोक चला है। ऐसे में अचानक ये घोषणाएं प्रमुख चुनावी मुद्दा बन गई हैं। अब लोगों की नजर है कि सत्ताधारी भाजपा इस मुद्दे की काट कैसे करती है।
इस तरह पुरानी पेंशन लागू करने की है योजना
सपा का घोषणापत्र तैयार करने की व्यवस्था से जुड़े थिंक टैंक में शामिल एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी कहते हैं कि पुरानी पेंशन की बहाली और आउटसोर्सिंग कर्मियों की समस्या के समाधान की कार्ययोजना बनाई जा सकती है।
- उनका दावा है, नई पेंशन में सरकार की ओर से 14 प्रतिशत का अंशदान किया जा रहा है। इस हिसाब से सालाना 5000-6000 करोड़ रुपये सरकार जमा कर रही हैै। इस तरह 2005 से अब तक करीब 75,000 करोड़ रुपये जमा हो चुके होंगे।
- सरकार इस अंशदान का एक कॉर्पस फंड बनाए और अपने हिस्से का अंशदान जारी रखे। आवश्यकता हो तो थोड़ा अंशदान बढ़ाने पर विचार कर ले। इस फंड का सही जगह निवेश हो, जिसके हानि-लाभ की जिम्मेदारी सरकार उठाए।
- दावा है कि फंड सही जगह लगाने के लिए फाइनेंशियल मैनेजमेंट टीम बनाई जाए और इसी कॉर्पस फंड से पुरानी पेंशन का भुगतान हो। वह कहते हैं कि एनपीएस लागू होने के बाद 2005 से नियुक्त कर्मी अगले कई वर्षों तक बहुत कम संख्या में रिटायर होंगे। अधिक संख्या में कर्मी 2032-33 के बाद रिटायर होने शुरू होंगे, तब तक कॉर्पस फंड का आकार काफी बढ़ जाएगा। इच्छाशक्ति होने पर कोई भी कल्याणकारी सरकार उचित प्रबंधन से पुरानी व्यवस्था का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से कर सकती है। इस व्यवस्था में सरकारी खजाने पर कोई अतिरिक्त भार भी नहीं आएगा।
सरकार ने नई पेंशन की विसंगतियां दूर करने के उठाए कई कदम
- नई पेंशन स्कीम के अंतर्गत सरकार ने अपना अंशदान 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया है। कर्मचारियों को पहले की तरह वेतन व महंगाई भत्ते के 10 प्रतिशत के समतुल्य धनराशि के मासिक अंशदान की व्यवस्था है। यह व्यवस्था सरकारी कर्मचारियों के साथ राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित स्वायत्तशासी संस्थाओं व सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं के कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगी।
- पेंशन निधि विकल्प : सरकारी कर्मचारी निजी क्षेत्र पेंशन निधि सहित किसी भी पेंशन निधि का चयन कर सकेंगे। वे वर्ष में एक बार अपना विकल्प बदल सकेंगे। हालांकि सार्वजनिक क्षेत्र पेंशन निधि की वर्तमान व्यवस्था मौजूदा व नए सरकारी कर्मियों के लिए उपलब्ध रहेगी।
- निवेश पद्धति का विकल्प : सरकारी कर्मचारियों की वर्तमान योजना मौजूदा और नए सरकारी कर्मियों के लिए जारी रहेगी। इसके अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र के तीन निधि प्रबंधकों के बीच उनके पूर्व के कार्य अनुभव के आधार पर निधियां आवंटित की जाएंगी।
- ऐसे कर्मी जो न्यूनतम जोखिम के साथ निश्चित लाभ का विकल्प चुनते हैं, को सरकारी प्रतिभूतियों में 100 प्रतिशत निवेश का विकल्प होगा।
- ऐसे कर्मी जो उच्चतर प्रतिफल के विकल्प का चयन करते हैं, उन्हें जीवनचक्र पर आधारित दो योजनाओं का विकल्प मिलेगा। पहला, परंपरागत जीवन चक्र निधि जिसमें इक्विटी में निवेश की अधिकतम सीमा 25 प्रतिशत होगी। दूसरा, सामान्य जीवन चक्र निधि जिसमें इक्विटी में निवेश की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत होगी।
- ब्याज सहित जमा होगा बकाया अंशदान : सरकार ने एक अप्रैल 2005 से 31 मार्च 2019 तक अंशदानों को जमा न करने अथवा देरी से जमा करने पर मय ब्याज मुआवजा देने का फैसला किया है। इसके लिए, करीब 10,500 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। जिन मामलों में 31 मार्च 2019 तक नियोक्ता अंशदान नहीं भेजे गए या देर से भेजे गए, भले ही कर्मी से अंशदानों की कटौती हुई हो या नहीं, उनमें नियोक्ता अंशदान की राशि अंशदान देय होने की तिथि से लेकर कर्मी के खाते में वास्तविक रूप से जमा होने तक की अवधि के लिए ब्याज के साथ कर्मी के एनपीएस खाते में जमा करने की व्यवस्था की गई।