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साइबर क्राइम से निपटने की डीजीपी ने बनाई रणनीति, ट्रेंड कॉप संभालेंगे केस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 11 Mar 2018 04:04 PM IST
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डीजीपी ओपी सिंह
- फोटो : amar ujala
साइबर क्राइम को लेकर पहले गृह विभाग की एडवाइजरी और फिर इन्वेस्टर्स समिट के दौरान गृह मंत्री की चिंता को देखते हुए डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने शनिवार को इस पर मंथन कर रणनीति बनाई।
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इसके साथ ही, उन्होंने आईजी एसटीएफ अमिताभ यश को इसके लिए शार्ट टर्म व लॉन्ग टर्म प्रस्ताव बनाने के निर्देश भी दिए।
डीजीपी ने बताया कि मौजूदा उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए साइबर क्राइम पर अंकुश लगाने और ट्रेनिंग क्वालिटी को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा। ताकि, अपराध से निपटने में आसानी हो सके।
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वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुई बैठक में आईजी एसटीएफ ने केंद्र सरकार की एडवाइजरी व उस पर एसटीएफ की ओर से तैयार कार्ययोजना की जानकारी दी। इस बात पर जोर दिया गया कि पूर्व में जिन पुलिस कर्मियों को साइबर क्राइम से निपटने के लिए ट्रेनिंग दिलाई गई है, उनका इस्तेमाल इसी काम में किया जाए।
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मालूम हो कि पूर्व में नोएडा में एसपी सिटी रहे दिनेश यादव ने कुछ पुलिस कर्मियों को इसकी ट्रेनिंग दिलाई थी। बाद में, सरकार बदली तो सभी पुलिस कर्मियों को अलग-अलग जिलों में थानों पर भेज दिया गया।
इस पर ट्रेनिंग लेने वालों की सूची तैयार करने के साथ ही जिला स्तर पर व एसटीएफ के साइबर थानों पर आवश्यकता के अनुसार उनकी तैनाती करने पर भी विचार किया गया।
साइबर क्राइम से निपटने के लिए राज्यों को केंद्र सरकार भी फंड उपलब्ध करा रहा है। इसके लिए आईजी क्राइम चंद्र प्रकाश को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
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25 लाख रुपये से अधिक के मामले आते हैं एसटीएफ साइबर थाने में
प्रदेश में अभी जो व्यवस्था है, उसके तहत साइबर क्राइम से निपटने के संसाधन न के बराबर हैं। पूर्ववर्ती सरकार ने जरूर दो साइबर थाने (लखनऊ व नोएडा) बनाए थे, लेकिन इनमें अब तक कुल 15 केस दर्ज हुए हैं। इसकी वजह यह है कि यहां सिर्फ 25 लाख रुपये से अधिक के साइबर क्राइम के मामले रजिस्टर होते हैं। इससे कम के केस स्थानीय स्तर पर थानों में दर्ज किए जाते हैं। जरूरत पड़ने पर एसटीएफ थाने की मदद ली जाती है।