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इकलौते बेटे ने ही दे दी मां-बाप को मारने की सुपारी

Sun, 17 May 2015 09:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ Updated Sun, 17 May 2015 09:13 AM IST
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Son organise murder of his parents in lucknow

गोसाईंगंज के बक्कास गांव में डलई (82) और उनकी पत्नी प्यारा (80) की हत्या इकलौते बेटे बाबूलाल ने ही कराई थी। उसने अपने साथी सरई गुदौली गांव निवासी सुभाष को हत्या की सुपारी के तौर पर दो लाख रुपये देने की बात कही थी।

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सीओ मोहनलालगंज राकेश नायक ने बताया बाबूलाल ने संपत्ति के लालच में माता-पिता की हत्या की साजिश रची थी। पुलिस ने बाबूलाल को वारदात वाली शाम ही हिरासत में ले लिया था जबकि सुभाष फरार था।
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सुभाष के बारे में छानबीन करने पर पता चला कि वह नबीखेड़ा स्थित ससुराल में रह रहा है। पुलिस ने सुपारी किलर की घेराबंदी शुरू की, लेकिन उसे भनक लग गई और वह भाग निकला। शनिवार दोपहर डेढ़ बजे बाबूलाल और सुभाष को सिठौली कला गांव के पास इंदिरा नहर रोड से दबोच लिया गया।

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शराब और शादी के लिए चाहिए थी रकम

Son organise murder of his parents in lucknow

बाबूलाल ने बताया कि पिता ने 18 बिसवा जमीन बेची थी। उससे मिली रकम वह पांच बहनों और उसके तीन बेटों में खर्च करते थे। एसओ विनोद यादव ने बताया कि वह शराब का लती था।

शराब पीने के लिए उसने कई बार बहाने से भी माता-पिता से रुपया ऐंठा। उसकी हरकतों का पता चलने के बाद उन्होंने रुपये देने बंद कर दिए। अक्सर रुपये लेने के लिए बाबूलाल का पिता से झगड़ा भी होता था। उसने बताया कि पत्नी की दो साल पहले मौत हो चुकी थी और वह दूसरी शादी करना चाहता था।

उसने माता-पिता से यह इच्छा बताई, लेकिन वे तैयार नहीं हुए। बाबूलाल का कहना है कि रोज शराब के लिए रुपये न देने और शादी की राह में रोड़ा बनने के बाद उसने दोनों की हत्या की साजिश रची।

सुभाष पहले भी अपने गांव के एक बुजुर्ग की हत्या कर चुका है। पुलिस के मुताबिक, सरई गुदौली गांव के 80 वर्षीय मायाराम की उसने वर्ष 2013 ट्यूबवेल पर सोते वक्त हत्या कर दी थी। पुलिस का कहना है कि मायाराम को भी उसने डंडे से ही पीट-पीटकर मार डाला था।

शराब के ठेके पर दे डाली मां-बाप की सुपारी

Son organise murder of his parents in lucknow

एसओ विनोद कुमार यादव ने बताया कि बाबूलाल की शराब पीने के दौरान ठेके पर ही सुभाष से मुलाकात हुई थी। अक्सर दोनों साथ में शराब पीते थे। बीते माह माता-पिता से झगड़े के बाद शराब पीने के दौरान ही उसने सुभाष से दोनों की हत्या के बारे में बातचीत की। सुभाष मोटी रकम मिलने के लालच में तुरंत इसके लिए तैयार हो गया।

सीओ ने बताया कि बाबूलाल ने सुभाष से हत्या के लिए दो लाख रुपये में सौदा तय किया था। सुभाष ने कुछ रुपया एडवांस मांगा, लेकिन बाबूलाल के पास फूटी कौड़ी नहीं थी। उसने कहा कि डलई की मौत के बाद जमीन उसके नाम ट्रांसफर हो जाएगी। इसके बाद जमीन बेचकर वह उसे दो लाख रुपये दे देगा।

सुभाष ने बताया कि जब वह घर पहुंचा तो डलई बरामदे में तखत पर लेटे थे जबकि प्यारा पास ही चूल्हे पर खाना पकाने की तैयारी कर रही थीं। कुछ ही देर बाद कंपाउंडर हरिलाल आ गया।

वह डलई का चेकअप करने लगा तो सुभाष बरामदे में पड़ी चारपाई पर लेट गया। कंपाउंडर के जाने के बाद सुभाष ने बाहर का दरवाजा भीतर से बंद करके पास ही पड़े बबूल के डंडे से प्यारा के सिर पर वार कर दिया।

प्यारा चूल्हे पर ही गिर पड़ीं। खून के छींटे चूल्हे व आसपास की दीवारों पर जा गिरे। डलई ने चीखने की कोशिश की लेकिन तब तक सुभाष ने उनके सिर पर भी डंडे से जोरदार वार किया। वह तखत पर ही बेहोश हो गए। इसके बाद सुभाष बाहर निकला और दरवाजे की कुंडी लगाकर चला गया। एसओ ने बताया कि हत्या के बाद सुभाष नबीखेड़ा अपनी ससुराल चला गया।

यह थी वारदात

Son organise murder of his parents in lucknow

बक्कास गांव निवासी डलई और उनकी पत्नी प्यारा की बुधवार सुबह डंडे से पीटकर हत्या कर दी गई थी। वृद्ध दंपती के साथ उनका इकलौता बेटा बाबूलाल व तीन पोते सूरज, विशाल और राहुल रहते थे। बाबूलाल मंगलवार शाम काकोरी के पतौरा निवासी बहन के घर आयोजित समारोह में गया था और बुधवार दोपहर तक लौटकर नहीं आया।

डलई के तीनों पोते भी सुबह ही काम से निकल गए थे। इस दौरान डलई का उपचार करने के लिए कंपाउंडर हरिलाल घर आया था। एक संदिग्ध युवक भी घर आया था। छानबीन में पता चला कि संदिग्ध युवक बाबूलाल का साथी सुभाष था। उसे बाबूलाल ने ही माता-पिता की हत्या के लिए भेजा था।

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