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Fraud: मशहूर रेस्टोरेंट के नाम पर ठगी, क्रेडिट कार्ड से 10 रुपये देकर बुक कराई थाली, एक लाख रुपये उड़ गए

Wed, 03 Aug 2022 02:39 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 03 Aug 2022 02:39 PM IST
सार

ग्राहकों को मशहूर रेस्टोरेंट में आधे दाम पर खाने की थाली उपलब्ध कराने के नाम पर जमकर ठगी की जा रही है। एडवांस में बुकिंग कराने के नाम पर साइबर ठग लोगों को शिकार बना रहे हैं।

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Cyber fraud on the name of cheap plate of popular restaurents.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

नामचीन रेस्टोरेंट के नाम पर फेसबुक के जरिए ठगी की जा रही है। आधे रेट में थाली उपलब्ध कराने का ऑफर देकर खातों से साइबर ठग हजारों रुपये उड़ा दे रहे। ठगी के इस नए तरीके का शिकार बड़ी संख्या में लोग हो रहे हैं। खासकर ऐसे लोग जो बाहर रेस्टोरेंट पर खाना खाते हैं या रेस्टोरेंट से खाना मंगाते हैं। मोबाइल नंबर, लोकेशन, ठगी का तरीका सब कुछ जानते हुए भी पुलिस कुछ नहीं कर पा रही है।

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उदाहरण के तौर पर लखनऊ के सुनील श्रीवास्तव को फेसबुक पर ऐसा ही एक विज्ञापन दिखा जिसमें शहर के नामचीन होटल की खाने की थाली आधे रेट में उपलब्ध कराने का ऑफर था। सुनील को यह आफर पसंद आया। उन्होंने फौरन दिए गए लिंक पर क्लिक किया। थोड़ी ही देर में सुनील के मोबाइल पर फोन आ गया। कॉलर ने कहा कि आपको आधे दाम में थाली मिल तो जाएगी लेकिन उसके लिए आपको कम से कम 10 रुपये क्रेडिट कार्ड से एडवांस देना पड़ेगा। सुनील इसके लिए राजी हो गए।
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सुनील को एक लिंक भेजा गया जिस पर 10 रुपये पेमेंट करने की बात कही गई। लेकिन सुनील ने जब पेमेंट किया तो उनके क्रेडिट कार्ड से 49760 रुपये कट गए। सुनील ने फौरन अपना कार्ड ब्लॉक करा दिया। लेकिन तब तक दो और ट्रांजक्शन 49532 रुपये व 2500 रुपये और कट चुके थे।
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सुनील के पास जब क्रेडिट कार्ड का स्टेटमेंट आया तो स्टेटमेंट देखके उनकेहोश उड़ गए। सुनील ने तत्काल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई लेकिन उनके क्रेडिट कार्ड से गई रकम वापस नहीं मिल सकी। जिस नंबर से फोन आया और जिस रेस्टोरेंट के नाम पर ठगी की गई, उसकी पूरी जानकारी पुलिस को भी दी गई। लेकिन पुलिस अपनी रफ्तार से इस मामले की जांच कर रही है।

इस तरह की ठगी का शिकार होने वाले सुनील अकेले नहीं हैं। सुनील के अलावा भी कई लोग इस तरह की ठगी का शिकार हो चुके हैं और साइबर क्राइम में रिपोर्ट दर्ज करा चुके हैं। इतना ही नहीं जिस रेस्टोरेंट के नाम पर ठगी की जा रही है, उसकी ओर से भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है, लेकिन कार्रवाई अब तक नहीं हो सकी है।

नाकाफी साबित हो रही साइबर ठगी रोकने की पुलिस की हर कवायद

दरअसल साइबर क्राइम मुख्यालय ने इस तरह के मामलों को तत्काल रजिस्टर करने या 1930 नंबर पर फोन करने को लेकर जमकर प्रचार प्रसार किया है। इसमें शिकायत जितनी जल्दी दर्ज की जाएगी पैसे की रिकवरी की संभावना उतनी अधिक बनी रहेगी।

दूसरे शब्दों में कहें तो पैसा अगर खाते से कटकर खाते में गया है और उसे निकाला नहीं गया है तो वह पैसा वापस मिलने की संभावना बनी रहती है। लेकिन पैसा आपके खाते से जिस खाते में गया वहां से फौरन कैश निकाल लिया गया तो पैसे वापस मिलना ना मुमकिन हो जाता है।

साइबर अपराध रोकने के लिए साइबर अपराध शाखा को तरह-तरह के संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं। साइबर ठग भी अब इस बात का खास ख्याल रखने लगे हैं। यही वजह से कि बीते एक-सवा साल में लगभग 180 करोड़ रुपये की ठगी हुई है। लेकिन रिकवरी रेट 6 से 7 प्रतिशत ही है।

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