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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Coal crisis in power plants: If there is no coal, then there is only three days' stock, due to water in the mines, there is a crisis in the whole country.

बिजलीघरों में कोयले का संकट : कहीं कोयला नहीं तो कहीं महज तीन दिन का स्टॉक, खदानों में पानी भरा होने की वजह से पूरे देश में संकट

Tue, 05 Oct 2021 09:23 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 05 Oct 2021 09:23 PM IST
सार

बिजली संकट खड़ा होने की आशंका को देखते हुए पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने ऊर्जा व कोयला मंत्रालय को पत्र भेजकर बिजलीघरों को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया है ताकि बिजली आपूर्ति पर असर न पड़े।

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Coal crisis in power plants: If there is no coal, then there is only three days' stock, due to water in the mines, there is a crisis in the whole country.
कोयला - फोटो : pixabay

विस्तार

त्यौहारी सीजन से पहले प्रदेश में बिजली संकट के आसार नजर आने लगे हैं। प्रदेश के बिजलीघरों में कोयले की भारी कमी हो गई है, जिसके कारण बिजली उत्पादन पर असर पड़ा है। कई बिजलीघरों में कोयला खत्म होने से जहां इकाइयां बंद करनी पड़ी हैं तो कुछ में महज तीन-चार दिन का स्टॉक बचा है। बिजली संकट खड़ा होने की आशंका को देखते हुए पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने ऊर्जा व कोयला मंत्रालय को पत्र भेजकर बिजलीघरों को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया है ताकि बिजली आपूर्ति पर असर न पड़े।

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राज्य विद्युत उत्पादन निगम के हरदुआगंज व पारीछा बिजलीघर में कोयले का स्टॉक खत्म हो जाने से 710 मेगावाट क्षमता की इकाइयां बंद करनी पड़ी हैं। निजी क्षेत्र की ललितपुर परियोजना की 600 मेगावाट तथा रोजा परियोजना की 300 मेगावाट क्षमता की इकाई भी कोयले की कमी के कारण बंद हो गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की अनपरा परियोजना में सिर्फ तीन दिन का स्टॉक बचा है जबकि ओबरा बिजलीघर में चार दिन का स्टॉक रह गया है। 
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अनपरा में रोजाना 40 हजार तथा ओबरा में 15000 मीट्रिक टन कोयले की जरूरत पड़ती है। अनपरा में बमुश्किल 25-26 हजार मीट्रिक टन कोयला ही पहुंच पा रहा है। अभियंताओं का कहना है कि जल्द कोयले की आपूर्ति सामान्य न हुई तो अनपरा व ओबरा जैसे बड़े बिजलीघरों में भी उत्पादन ठप हो सकता है और इससे प्रदेश की बिजली आपूर्ति पर असर पड़ना तय है। 
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अधिकारियों का कहना है कि भारी बारिश के कारण खदानों में पानी भर जाने की वजह से कोयले की निकासी नहीं हो पा रही है। केवल यूपी ही नहीं पूरे देश में कोयले का संकट खड़ा हुआ है। जिन बिजलीघरों में कोयले का स्टॉक कम रह गया है वहां उत्पादन घटा दिया गया है ताकि इकाइयां पूरी तरह बंद करने की नौबत न आए। प्रदेश में बिजली के उत्पादन में तक रीबन 2000 मेगावाट की कमी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि चूंकि अभी मांग बहुत ज्यादा नहीं है इसलिए स्थिति नियंत्रण में है। लेकिन, इसी सप्ताह नवरात्रि के साथ शुरू हो रहे त्यौहारी सीजन में मांग बढ़ने की संभावना है। 


यह सही है कि बिजलीघरों में कोयले की कमी हो गई है। यह समस्या केवल यूपी ही नहीं बल्कि पूरे देश में है। कोयला खदानों में पानी भर जाने की वजह से यह स्थिति पैदा हुई है। कोयले की आपूर्ति के लिए भारत सरकार को पत्र लिखा गया है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन स्थिति पर नजर रखी जा रही है। उम्मीद है कि जल्द ही कोयले की समस्या दूर होगी और बिजलीघरों में पूरी क्षमता से उत्पादन शुरू होगा।
- एम. देवराज, अध्यक्ष यूपी पावर कॉर्पोरेशन

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