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योगी के काम पर भाजपा सजाएगी 2022 की बिसात, चुनावी लड़ाई को ‘विश्वास बनाम अविश्वास’ पर केंद्रित करने की रणनीति

Mon, 15 Mar 2021 10:19 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 15 Mar 2021 10:19 PM IST
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BJP state working committee meeting: political resolution passed for self-reliant India and best Uttar Pradesh
भाजपा कार्यसमिति की बैठक में रक्षामंत्री, मुख्यमंत्री व अन्य पदाधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
सरकार के चार वर्ष का कार्यकाल पूरा होने से तीन दिन पहले सोमवार को यहां हुई भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक ने साफ  कर दिया कि भाजपा 2022 की चुनावी बिसात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामों पर ही सजाने की तैयारी में है। कार्यसमिति की क्लोज डोर बैठक में लाए गए राजनीतिक प्रस्ताव और संगठन के पदाधिकारियों तथा प्रतिनिधियों के बीच विचारों के आदान-प्रदान ने यह साफ  कर दिया है।
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इसका मतलब यह नहीं है कि 2022 की चुनावी फतह के लिए भाजपा मोदी सरकार के कामों पर फोकस नहीं करेगी। सहारा उनका भी लिया जाएगा। पर रणनीति यह है कि प्रदेश सरकार के रिपोर्ट कार्ड के साथ चुनावी लड़ाई को लोगों के बीच ‘विश्वास बनाम अविश्वास’ में बदला जाए। लोगों के दिमाग यह बात बैठाई जाए कि भाजपा सरकार सपा, बसपा और कांग्रेस जैसी नहीं है  जो वोट लेने और सरकार बनाने के बाद जनता से किए गए वादे भूल जाए। लोगों के दिमाग में यह बात भी बैठाई जाए कि सिर्फ  भाजपा सरकार ही लोगों की आकांक्षाओं को पूरा कर सकती है।  हिंदुत्व के सरोकारों पर खरी उतर सकती है। भ्रष्टाचार व अपराधमुक्त शासन-प्रशासन देते हुए कुनबों की राजनीति समाप्त कर सकती है।
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राष्ट्रवाद व सरोकारों पर नजर
राजनीतिक प्रस्ताव से साफ  हो जाता है कि भाजपा की कोशिश 2022 की चुनावी जंग को वादों को इरादों में बदलने वाली भाजपा सरकार बनाम सिर्फ  वादों वाली विपक्षी दलों के सरकार का रूप देना चाहती है। राजनीतिक प्रस्ताव में राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक सरोकारों को भी काफी करीने से समावेशित किया गया है। हिंदुत्व के सरोकारों से जुड़े स्थलों अयोध्या, मथुरा, काशी के साथ  रामायण सर्किट, बौद्ध सर्किट जैसे कामों का उल्लेख कर इन्हें भी जनता को स्मरण कराने की योजना बनाई गई है। हालांकि पता नहीं राजनीतिक प्रस्ताव बनाने वालों से विंध्यवासिनी धाम के लिए सरकार की तरफ  से कराए गए काम कैसे छूट गए हैं? इसकी बैठक में चर्चा भी रही।  आजादी के 75 साल पर होने वाले अमृत महोत्सव की तैयारी के जरिये स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और उनसे जुड़े स्थलों के प्रति भाजपा के सम्मान व समर्पण का संदेश देने की तैयारी का संकेत भी राजनीतिक प्रस्ताव से मिल रहा है ।
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