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UP: आरक्षण के लिए OBC आयोग के गठन की मंजूरी, 6 माह में देनी होंगी सिफारिशें, सेवानिवृत्त जज करेंगे अध्यक्षता
Tue, 19 May 2026 05:38 AM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 19 May 2026 05:38 AM IST
सार
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से संबंधित सिफारिशें देने के लिए यूपी राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक में 12 प्रस्ताव मंजूर हुए।
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योगी कैबिनेट का फैसला।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से संबंधित सिफारिशें देने के लिए यूपी राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक में 12 प्रस्ताव मंजूर हुए।
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कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए इस आयोग के गठन को मंजूरी दी गई है। आयोग प्रदेश में पिछड़े वर्गों की स्थिति, जनसंख्या, सामाजिक प्रतिनिधित्व व पंचायतों में भागीदारी का समकालीन एवं अनुभवजन्य अध्ययन करेगा। फिर निकायवार आनुपातिक आरक्षण तय करने के लिए अपनी सिफारिशें देगा। इसी के आधार पर आरक्षण लागू होने के बाद ही पंचायत चुनाव हो पाएंगे।
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वित्त मंत्री ने बताया, उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 और क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत पंचायतों में आरक्षण की व्यवस्था लागू है। पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल पदों के 27 फीसदी से अधिक नहीं होगा। अगर जनसंख्या के ताजा आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे तो सर्वेक्षण के माध्यम से आंकड़े निर्धारित किए जा सकेंगे। आयोग का कार्यकाल छह माह का होगा। आयोग प्रदेश की ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायतों में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण तय करने के उद्देश्य से आंकड़ों का अध्ययन करेगा।
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पांच सदस्यीय आयोग हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज करेंगे अध्यक्षता
आयोग में पांच सदस्य होंगे, जिन्हें राज्य सरकार नामित करेगी। इनमें एक सदस्य हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे, जिन्हें अध्यक्ष बनाया जाएगा। आयोग में ऐसे व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें पिछड़े वर्गों से जुड़े मामलों का ज्ञान व अनुभव हो। सरकार ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-घ और संबंधित अधिनियमों की धाराओं के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए पंचायतों में आरक्षण का प्रावधान है। पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल पदों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों में आरक्षण का अंतिम निर्धारण किया जाएगा।