लखनऊ। रमजान मुबारक के आखिरी जुमा में अलविदा की नमाज के साथ ही शुक्रवार को माहे मुबारक के रुखसत होने का ऐलान भी हो जाएगा। लॉकडाउन की वजह से यह पहला मौका होगा जब अलविदा की नमाज रोजेदार मस्जिदों के बजाय घरों में अदा करेंगे। उलमा ने अलविदा को कुद्स दिवस के तौर पर मनाने और इजराइल का ऑनलाइन विरोध करने की अपील की है। वहीं, अलविदा की नमाज में बैतूल मुकद्दस की हिफाजत और कोरोना वायरस के खात्मे की दुआएं मांगने की भी अपील की गई। ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि इस्लामी शरीयत में मस्जिद-ए-हरम और मस्जिद-ए-नबवी के बाद सबसे अधिक मर्तबा मस्जिद-ए-अक्सा का है, जो मुसलमानों का किबला-ए-अव्वल है। मौलाना ने कहा कि बेतुल मुकद्दस वो मुबारक और पाकीजा जगह है, जहां पर बड़े-बड़े नबी आराम फरमा रहे हैं। इसी स्थान पर पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब ने मेराजुन्नबी के अवसर पर तमाम नदियों की इमामत फरमाई। इजराइल इस पाकीजा जगह पर कब्जा करने की नापाक कोशिश कर रहा है। उन्होंने अलविदा की नमाज के बाद मस्जिद ए अक्सा की हिफाजत के लिए दुआएं करने की अपील की। मजलिस-ए-ओलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना कलबे जवाद नकवी ने भारत के सभी इमामों और धार्मिक संगठनों एवं अंजुमनों तथा सभी मुसलमानों से अपील करते हुए कहा कि वह जुमातुलविदा को फिलिस्तीनियों के समर्थन और इजराइल के आतंकवाद का ऑनलाइन विरोध करें। कोरोना के चलते 22 मई को होने वाला अंतरराष्ट्रीय कुद्स दिवस भी स्थगित कर दिया गया है, लेकिन ऑनलाइन प्रदर्शन होगा। इस्लामिक सेंटर में ऑनलाइन कुरानी महफिल लखनऊ। इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया फरंगी महल ने अंतरराष्ट्रीय महामारी कोरोना से प्रभावित इस दौर में ऑनलाइन कुरानी महफिल का आयोजन किया। सेंटर के कुरानी अध्ययन विभाग के मौलाना जफरूद्दीन नदवी, कारी तरीकुल इस्लाम और कारी अब्दुल हई रशीद फरंगी महली विद्यार्थी कक्षा-6 लामार्टीनियर कॉलेज ने कुरान करीम के दो पारों की रोज तिलावत की। मौलना नदवी ने कुरानी आयतों का संछिप्त तर्जुमा किया। रमजान की 27वीं शब बृहस्पतिवार को ऐशबाग ईदगाह में कुरानी महफिल का आयोजन हुआ। इसमें मौलाना जफरूद्दीन ने अरबी लहजे में सूरतुल कद्र की तिलावत की। मौलाना ने इडक अनुवाद बताते हुए कहा कि रमजान के आखिरी अशरे में 5 ताक रातें 21, 23, 25, 27, और 29 हैं। जिनमें कोई एक शब-ए-कद्र होती हैं। खुशनसीब हैं वे लोग जिनको रमजान की बरकतें मिल जाएं।